भारतकोश
कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( ५० ) HINDI TRANSLATION :—जो गेंद के खेलने से भी थक जाती थी वही ( अब ) तपस्वियों का आचरण ( कठोर तपस्या ) कर रही थी । सचमुच उसका शरीर सोने के कमल का बना हुआ था ( क्योंकि ) स्वभाव से ही कोमल एवं कठोर या शक्ति- शाली था ॥ १६ ॥ ENGLISH TRANSLATION —She, who was wearied even by playing with the ball, betook herself to the life of ascetics, verily her body was made of gold lotuses, as it was by nature delicate as well as possessed of strength 19. PURPORT IN SANSKRIT —या पार्वती पूर्वमतिकोमल- शरीरासीत् कन्दुकक्रीडादिभिरपि च श्रान्ताभूत् सैवेदानीं मुनीनां कठिनं व्रतं सहर्षमाचरति स्म । एतत्समीक्ष्य कविस्तर्कयति— यन्नूनं तस्याः शरीरं सुवर्णपद्मेन विरचितमासीत्, यत्स्वभावेनैव कमलमिव कोमलं सुवर्णमिव च कठोरं शक्तिसम्पन्नं वाभूत् । पार्वती मृदुशरीरापि सती कठिनतप आचरितुं शकासीदिति कवेस्तात्पर्यम् ॥ १६ ॥ शुचौ चतुर्णां ज्वलतां हविर्भुजां शुचिस्मिता मध्यगता सुमध्यमा । विजित्य नेत्रप्रतिघातिनीं प्रभा— मनन्यदृष्टिः सवितारमैक्षत ॥ २० ॥ शुचाविति । शुचौ ग्रीष्मे शुचिस्मिता विशदमन्दहासा सुमध्यमा पार्वती ज्वलतां दीप्तिमतां चतुर्णां हविर्भुजां अग्नीनां मध्यगता सती । नेत्रे प्रतिहन्तीति तां नेत्रप्रतिघातिनीं प्रभां सावित्रं तेजः विजित्य । न विद्यतेऽन्यत्र दृष्टिर्यस्याः सा अनन्यदृष्टिः सती

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