संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण
Kurma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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| १४२ | * कूर्मपुराण * |
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| उत्पन्नाः पितृकन्यायां विरजायां महाबलाः।<br>यतिर्ययातिः संयातिरायतिः पञ्चकोऽश्वकः ॥ ५ ॥ | पितरोंकी कन्या विरजासे नहुषको यति, ययाति, संयाति, आयति तथा पाँचवें अश्वक नामवाले इन्द्रके समान तेजस्वी महाबलशाली पाँच पुत्र उत्पन्न हुए। इन पाँचोंमेंसे ययाति महान् बलशाली और पराक्रमी था। उसने शुक्राचार्यकी पुत्री देवयानी तथा वृषपर्वाकी असुर-वंशमें उत्पन्न शर्मिष्ठा नामकी कन्याको पत्नीरूपमें प्राप्त किया ॥ ३–६ ॥ |
| तेषां ययातिः पञ्चानां महाबलपराक्रमः।<br>देवयानीमुशनसः सुतां भार्यामवाप सः।<br>शर्मिष्ठामासुरीं चैव तनयां वृषपर्वणः ॥ ६ ॥<br>यदुं च तुर्वसुं चैव देवयानी व्यजायत।<br>द्रुह्युं चानुं च पूरुं च शर्मिष्ठा चाप्यजीजनत् ॥ ७ ॥ | देवयानीने यदु तथा तुर्वसुको जन्म दिया। इसी प्रकार शर्मिष्ठाने भी द्रुह्यु, अनु तथा पूरुको उत्पन्न किया। उस (ययाति)–ने अनिन्दित ज्येष्ठ पुत्र यदुका अतिक्रमणकर पिताके वचनका पालन करनेवाले छोटे पुत्र पूरुको ही (राजपदपर) अभिषिक्त किया ॥ ७–८ ॥ |
| सोऽभ्यषिञ्चदतिक्रम्य ज्येष्ठं यदुमनिन्दितम्।<br>पूरुमेव कनीयांसं पितुर्वचनपालकम् ॥ ८ ॥<br>दिशि दक्षिणपूर्वस्यां तुर्वसुं पुत्रमादिशत्।<br>दक्षिणापरयो राजा यदुं ज्येष्ठं न्ययोजयत्।<br>प्रतीच्यामुत्तरायां च द्रुह्युं चानुमकल्पयत् ॥ ९ ॥ | राजा ययातिने दक्षिण-पूर्व दिशामें तुर्वसु नामक पुत्रको, दक्षिण-पश्चिम दिशामें ज्येष्ठ पुत्र यदुको, पश्चिममें द्रुह्युको और उत्तर दिशामें अनुको (राजाके रूपमें) नियुक्त किया। उन्होंने इस सम्पूर्ण पृथ्वीका धर्मपूर्वक पालन किया। महायशस्वी राजा (ययाति) भी पत्नीसहित वन चले गये। यदुके भी देवपुत्रोंके समान सहस्रजित्, क्रोष्टु, नील, अजित तथा रघु नामक पाँच पुत्र हुए, उनमें सहस्रजित् सबसे बड़ा था ॥ ९–११ ॥ |
| तैरियं पृथिवी सर्वा धर्मतः परिपालिता।<br>राजापि दारसहितो वनं प्राप महायशाः ॥ १० ॥ | |
| यदोरप्यभवन् पुत्राः पञ्च देवसुतोपमाः।<br>सहस्रजित् तथा ज्येष्ठः क्रोष्टुर्नीलोऽजितो रघुः ॥ ११ ॥ | |
| सहस्रजित्सुतस्तद्वच्छतजिन्नाम पार्थिवः।<br>सुताः शतजितोऽप्यासंस्त्रयः परमधार्मिकाः ॥ १२ ॥<br>हैहयश्च हयश्चैव राजा वेणुहयः परः।<br>हैहयस्याभवत् पुत्रो धर्म इत्यभिविश्रुतः ॥ १३ ॥ | सहस्रजित्का उसीके समान शतजित् नामका पुत्र राजा था। शतजित्के भी हैहय, हय और वेणुहय नामक परम धार्मिक तीन पुत्र थे। हैहयका पुत्र 'धर्म' नामसे विख्यात हुआ ॥ १२–१३ ॥ |
| तस्य पुत्रोऽभवद् विप्रा धर्मनेत्रः प्रतापवान्।<br>धर्मनेत्रस्य कीर्तिस्तु संजितस्तत्सुतोऽभवत् ॥ १४ ॥ | विप्रो ! उसका (धर्मका) धर्मनेत्र नामवाला प्रतापी पुत्र हुआ। धर्मनेत्रका कीर्ति और उसका पुत्र संजित हुआ। संजितका महिष्मान् हुआ और उसका पुत्र भद्रश्रेण्य था। भद्रश्रेण्यका दुर्दम नामका पुत्र राजा था। दुर्दमका धनक नामवाला बुद्धिमान् और वीर्यवान् पुत्र था। धनकके लोकमें सम्मानित चार पुत्र हुए—कृतवीर्य, कृताग्नि, कृतवर्मा तथा चौथा कृतौजा। कृतवीर्यका पुत्र अर्जुन हुआ। वह हजार बाहुओंवाला, द्युतिमान् तथा धनुर्वेद जाननेवालोंमें श्रेष्ठ था। जमदग्निके पुत्र जनार्दन परशुराम उस (सहस्रार्जुन)–के लिये मृत्युरूप हुए। (अर्थात् परशुरामके द्वारा वह मारा गया) ॥ १४–१८ ॥ |
| महिष्मान् संजितस्याभूद् भद्रश्रेण्यस्तदन्वयः।<br>भद्रश्रेण्यस्य दायादो दुर्दम्रो नाम पार्थिवः ॥ १५ ॥ | |
| दुर्दमस्य सुतो धीमान् धनको नाम वीर्यवान्।<br>धनकस्य तु दायादाश्चत्वारो लोकसम्मिताः ॥ १६ ॥ | |
| कृतवीर्यः कृताग्निश्च कृतवर्मा तथैव च।<br>कृतौजाश्च चतुर्थोऽभूत् कार्तवीर्योऽर्जुनोऽभवत् ॥ १७ ॥ | |
| सहस्रबाहुर्धृतिमान् धनुर्वेदविदां वरः।<br>तस्य रामोऽभवन्मृत्युर्जामदग्न्यो जनार्दनः ॥ १८ ॥ | |
| तस्य पुत्रशतान्यासन् पञ्च तत्र महारथाः।<br>कृतास्त्रा बलिनः शूरा धर्मात्मानो मनस्विनः ॥ १९ ॥ | उस (सहस्रबाहु)–के सौ पुत्र थे, जिनमें पाँच पुत्र महारथी, अस्त्र-सम्पन्न, बली, शूर, धर्मात्मा तथा मनस्वी थे ॥ १९ ॥ |