संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण
Kurma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished506 पृष्ठ
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| १५० | * कूर्मपुराण * |
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| कण्व उवाच | कण्व बोले— (राजन्! तुम) ईश्वर जहाँ विशेषरूपसे |
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| गच्छ वाराणसीं दिव्यामीश्वराध्युषितां पुरीम्।<br>आस्ते मोचयितुं लोकं तत्र देवो महेश्वरः ॥ ४१ ॥ | निवास करते हैं, उस दिव्य वाराणसीपुरीमें जाओ। संसारको मुक्त करनेके लिये महेश्वर देव वहाँ रहते हैं। |
| स्नात्वा संतर्प्य विधिवद् गङ्गायां देवताः पितॄन्।<br>दृष्ट्वा विश्वेश्वरं लिङ्गं किल्बिषान्मोक्ष्यसेऽखिलात् ॥ ४२ ॥ | गङ्गामें स्नानकर विधिपूर्वक देवताओं एवं पितरोंका तर्पणकर विश्वेश्वर लिङ्गका दर्शन करनेसे तुम सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त हो जाओगे ॥ ४१-४२ ॥ |
| प्रणम्य शिरसा कण्वमनुज्ञाप्य च दुर्जयः।<br>वाराणस्यां हरं दृष्ट्वा पापान्मुक्तोऽभवत् ततः ॥ ४३ ॥ | इसके बाद कण्वको सिरसे प्रणामकर और उनकी आज्ञा प्राप्तकर वह दुर्जय वाराणसीमें गया और भगवान् शंकरका दर्शनकर पापसे मुक्त हो गया ॥ ४३ ॥ |
| जगाम स्वपुरीं शुभ्रां पालयामास मेदिनीम्।<br>याजयामास तं कण्वो याचितो घृणया मुनिः ॥ ४४ ॥ | (तदनन्तर वह) अपनी सुन्दर पुरीमें जाकर पृथ्वीका पालन करने लगा। प्रार्थना करनेपर कण्व मुनिने कृपा करके उसका यज्ञ कराया। उसका बुद्धिमान् पुत्र |
| तस्य पुत्रोऽथ मतिमान् सुप्रतीक इति श्रुतः।<br>बभूव जातमात्रं तं राजानमुपतस्थिरे ॥ ४५ ॥ | 'सुप्रतीक' इस नामसे विख्यात हुआ। उत्पन्न होते ही उसे (लोगोंने) राजा मान लिया। ब्राह्मणो! उर्वशीसे |
| उर्वश्यां च महावीर्याः सप्त देवसुतोपमाः।<br>कन्या जगृहिरे सर्वा गन्धर्वदयिता द्विजाः ॥ ४६ ॥ | देवपुत्रोंके समान महान् वीर्यवान् सात पुत्र हुए। उन्होंने गन्धर्वोंकी कन्याओंको अपनी पत्नी बनाया ॥ ४४-४६ ॥ |
| एष वः कथितः सम्यक् सहस्रजित उत्तमः।<br>वंशः पापहरो नॄणां क्रोष्टोरपि निबोधत ॥ ४७ ॥ | आप लोगोंसे (मैंने) यह मनुष्योंके पापको नष्ट करनेवाला सहस्रजित्का उत्तम वंश भलीभाँति बतलाया। अब क्रोष्टुके वंशको भी सुनें ॥ ४७ ॥ |
इति श्रीकूर्मपुराणे षट्सहस्र्यां संहितायां पूर्वविभागे द्वाविंशोऽध्यायः ॥ २२ ॥
इस प्रकार छः हजार श्लोकोंवाली श्रीकूर्मपुराणसंहिताके पूर्वविभागमें बाइसवाँ अध्याय समाप्त हुआ ॥ २२ ॥
तेईसवाँ अध्याय
यदुवंश-वर्णनमें क्रोष्टुवंशी राजाओंका वृत्तान्त, राजा नवरथकी कथा, सात्त्वतवंश-वर्णनमें अक्रूरकी उत्पत्ति, राजा आनकदुन्दुभिका आख्यान, कंस एवं वसुदेव-देवकीकी उत्पत्ति, वसुदेवका वंश-वर्णन, देवकीके अन्य पुत्रोंकी उत्पत्ति, रोहिणीसे संकर्षण-बलराम तथा देवकीसे श्रीकृष्णका आविर्भाव, वासुदेव कृष्णका वंश-वर्णन
| सूत उवाच | सूतजीने कहा— क्रोष्टुका एक पुत्र हुआ जो वृजिनीवान् |
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| क्रोष्टोरेकोऽभवत् पुत्रो वृजिनीवानिति श्रुतिः।<br>तस्य पुत्रो महान् स्वातिरुशद्गुस्तत्सुतोऽभवत् ॥ १ ॥ | नामसे प्रसिद्ध हुआ। उसका महान् पुत्र स्वाति हुआ और उसका पुत्र उशद्गु हुआ। उशद्गुका चित्ररथ नामका |
| उशद्गोरभवत् पुत्रो नाम्ना चित्ररथो बली।<br>अथ चैत्ररथिर्लोके शशबिन्दुरिति स्मृतः ॥ २ ॥ | बलवान् पुत्र हुआ। चित्ररथका पुत्र लोकमें शशबिन्दु नामसे विख्यात हुआ। उसका पृथुयशा नामवाला पुत्र |
| तस्य पुत्रः पृथुयशा राजाभूद् धर्मतत्परः।<br>पृथुकर्मा च तत्पुत्रस्तस्मात् पृथुजयोऽभवत् ॥ ३ ॥ | धर्मपरायण राजा हुआ। उसका पुत्र पृथुकर्मा और उससे पृथुजय हुआ ॥ १-३ ॥ |