भारतकोश
संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण

Kurma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished506 पृष्ठ

पृष्ठ 419, कुल 506 में से

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पृष्ठ 419
  • अध्याय ३१ * ४०९

ओं नमो ब्रह्मणे तुभ्यं विद्यायै ते नमो नमः।<br>नमो मूलप्रकृतये महेशाय नमो नमः॥ ५२॥<br><br>नमो विज्ञानदेहाय चिन्तायै ते नमो नमः।<br>नमस्ते कालकालाय ईश्वरायै नमो नमः॥ ५३॥<br><br>नमो नमोऽस्तु रुद्राय रुद्राण्यै ते नमो नमः।<br>नमो नमस्ते कामाय मायायै च नमो नमः॥ ५४॥<br><br>नियन्त्रे सर्वकार्याणां क्षोभिकायै नमो नमः।<br>नमोऽस्तु ते प्रकृतये नमो नारायणाय च॥ ५५॥<br><br>योगदायै नमस्तुभ्यं योगिनां गुरवे नमः।<br>नमः संसारनाशाय संसारोत्पत्तये नमः॥ ५६॥<br><br>नित्यानन्दाय विभवे नमोऽस्त्वानन्दमूर्तये।<br>नमः कार्यविहीनाय विश्वप्रकृतये नमः॥ ५७॥<br><br>ओंकारमूर्तये तुभ्यं तदन्तःसंस्थिताय च।<br>नमस्ते व्योमसंस्थाय व्योमशक्त्यै नमो नमः॥ ५८॥<br>इति सोमाष्टकेनेशं प्रणनाम पितामहः।<br>पपात दण्डवद् भूमौ गृणन् वै शतरुद्रियम्॥ ५९॥<br><br>अथ देवो महादेवः प्रणतार्तिहरो हरः।<br>प्रोवाचोत्थाप्य हस्ताभ्यां प्रीतोऽस्मि तव साम्प्रतम्॥ ६०॥<br>दत्त्वासौ परमं योगमैश्वर्यमतुलं महत्।<br>प्रोवाचाग्रे स्थितं देवं नीललोहितमीश्वरम्॥ ६१॥<br><br>एष ब्रह्मास्य जगतः सम्पूज्यः प्रथमः सुतः।<br>आत्मनो रक्षणीयस्ते गुरुर्ज्येष्ठः पिता तव॥ ६२॥ओंकार ब्रह्मरूप आपको नमस्कार है, विद्यारूप आपको नमस्कार है। मूलप्रकृतिको नमस्कार है, महेश्वरको बार-बार नमस्कार है। विज्ञानस्वरूप देहवाले (महेश्वर)-को नमस्कार है, चिन्तन (विचारशक्ति-चितिस्वरूप) आप (देवी)-को नमस्कार है। कालके भी काल आपको नमस्कार है, ईश्वरीको बार-बार नमस्कार है। रुद्रके लिये बार-बार नमस्कार है, रुद्राणी आपको बार-बार नमस्कार है। काम (समस्त प्रपञ्चको मोहित करनेवाले) आपको बार-बार नमस्कार है और मायाको बार-बार नमस्कार है। सभी कार्योंके नियामक (महेश्वर) और क्षोभ उत्पन्न करनेवाली (सृष्टिके लिये कूटस्थ परब्रह्ममें उत्कट इच्छा जाग्रत् करनेवाली (उमा)-को बारंबार नमस्कार है। प्रकृतिरूप आप (देवी)-को तथा नारायण (महेश्वर)-को नमस्कार है। योग प्रदान करनेवाली आपको नमस्कार है और योगियोंके गुरु (शंकर)-को नमस्कार है। संसारका विनाश (प्रलय) करनेवाले (महेश्वर)-को नमस्कार है तथा संसारकी उत्पत्ति करनेवाली (देवी)-को नमस्कार है। नित्यानन्द, विभु तथा आनन्दमूर्तिको नमस्कार है। कार्यविहीन (विकाररहित)-को नमस्कार है, विश्वप्रकृति (देवी)-को नमस्कार है। ओंकारमूर्ति तथा उसके भीतर प्रतिष्ठित रहनेवाले आपको नमस्कार है। आकाशमें स्थित व्योमशक्ति* (ब्रह्मशक्ति देवी)-को बार-बार नमस्कार है॥ ५२-५८॥<br><br>इस प्रकार पितामह ब्रह्माने इस सोमाष्टक (नामक स्तुति)-से ईशको प्रणाम किया और शतरुद्रियका पाठ करते हुए उन्होंने दण्डवत् भूमिपर गिरकर साष्टाङ्ग प्रणिपात किया। तदनन्तर प्रणतजनोंके कष्टको हरनेवाले देव, हर, महादेवने दोनों हाथोंसे उन्हें (ब्रह्माको) उठाया और कहा—इस समय मैं आपके ऊपर प्रसन्न हूँ॥ ५९-६०॥<br><br>अनन्तर उन्हें (ब्रह्माको) परम योग और अतुल महान् ऐश्वर्य प्रदानकर महादेवने सम्मुख स्थित ईश्वर नीललोहित देवसे कहा—ये ब्रह्मा मेरे प्रथम पुत्र हैं, इस संसारके पूज्यके रूपमें प्रसिद्ध हैं। गुरु, ज्येष्ठ एवं आपके पिता हैं, आपको इनकी रक्षा करनी चाहिये॥ ६१-६२॥

* व्योम ब्रह्मका भी नाम है।

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