भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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अजन्त-पुल्लिङ्ग-प्रकरणम् १८६ स्तम्भ १ शब्द = अर्थ जनक = पिता तनय = पुत्र देवर* = देवर दौहित्र* = दोहता धव = पति पितामह = दादा पितृव्य* = चाचा पौत्र* = पोता प्रपितामह = परदादा प्रपौत्र* = परपोता भागिनेय = भांजा भ्रातृव्य* = भतीजा, शत्रु भ्रात्रीय* = भतीजा - मातामह = नाना मातुल = मामा मातुलेय = मामे का पुत्र श्याल = साला श्वशुर* = ससुर सोदर* = सगा भाई स्वस्रीय* = भांजा [अथ खाद्यान्नादिवाचकाः] अपूप = पूआ आम्र* = आम का वृक्ष कुलत्थ = कुलथी कोविदार* = कचनार गुड = गुड़ गृञ्जन = गाजर गोधूम = गेहूं चणक = चना चम्पक = चम्पावृक्ष तिल = तिल दाडिम = अनारवृक्ष नारिकेल = नारियल पेड़ निम्ब = नीम (पेड़) स्तम्भ २ शब्द = अर्थ पटोल = परवल माष* = उड़द मुद्ग = मूंग सर्षप* = सरसों संयाव = हलुआ [अथ मनुष्यवर्गस्थ-शब्दाः] अकिञ्चन = निर्धन अज्ञ = मूर्ख अध्यापक = अध्यापक अध्वनीन = मुसाफिर अन्ध = अन्धा अर्चक = पुजारी अशिक्षित = अनपढ़ अश्वारोह* = घुड़सवार कर्णेजप = चुगलखोर काण = काना कृतघ्न = अकृतज्ञ कृतज्ञ = शुक्रगुजार कृपण = कंजूस केशव = श्रीकृष्ण कोविद = पण्डित क्षत्रिय* = क्षत्रिय खल = दुष्ट गर्धन = लोभी गुप्तचर* = दूत घस्मर* = पेटू चिकित्सक = वैद्य चिरक्रिय* = सुस्त जागरूक* = सावधान जिह्म = कुटिल तस्कर* = चोर तूष्णीक = चुप दर्शक = दर्शक दानव = दैत्य स्तम्भ ३ शब्द = अर्थ दुर्विनीत = अनम्र देव = देवता धनिक = धनी नट = नटवा नर्मद = मसखरा नापित = नाई नाविक = मल्लाह निशाचर* = राक्षस निःसङ्ग = बेहोश निःस्व = निर्धन नृप* = राजा न्यायाधीश = जज पथिक = मुसाफिर परिचारक* = सेवक पाचक = रसोइया पुरन्दर* = इन्द्र वधिर* = वहरा भारक* = कुली मन्मथ = कामदेव मल्ल = पहलवान मायिक = मायावी मितम्पच = कञ्जूस याचक = भिक्षुक याष्टीक = लाठीधारी रथिक = रथी रुग्ण = रोगी वक्र* = टेढ़ा विप्र* = ब्राह्मण वैश्य = वैश्य वैहासिक = मसखरा शाक्तीक = शक्तिधारी शूद्र* = शूद्र सतीर्थ्य = सहपाठी स्तावक = स्तुतिकर्ता