भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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पृष्ठ 439

४२४ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्यां द्विवचन के पर होने पर (च) भी (युष्मदस्मदोः) युष्मद् और अस्मद् के स्थान पर (आ) आकार आदेश हो जाता है। अलोऽन्त्यविधि से यह आकार आदेश अन्त्य अल् —दकार के स्थान पर होता है। युवद् + आम् आवद् + आम्। यहां प्रकृतसूत्र से दकार को आकार आदेश होकर— युव आ+अम्, आव आ+अम् हुआ। अब अकः सवर्णे दीर्घः (४२) से सवर्णदीर्घ और अमि पूर्वः (१३५) से पूर्वरूप करने पर— 'युवाम्, आवाम्' प्रयोग सिद्ध होते हैं। [भाषाग्राम्य कथन में वद से युवम् आवम् बनेंगे]। युष्मद् + जस् अस्मद् + जस् —यहां ङे प्रथमयोरम् (३११) से जस् को अम् आदेश हो जाता है। 'युष्मद्+अम्, अस्मद्+अम्' इस स्थिति में अग्रिमसूत्र प्रवृत्त होता है— [लघु०] विधि-सूत्रम्— (३१६) यूयवयौ जसि ॥७।२।६३॥ अनयोर्मपर्यन्तस्य यूयवयौ स्तो जसि। यूयम्। वयम्॥ अर्थ —जस् परे होने पर युष्मद् और अस्मद् शब्दों का म्पर्यन्त क्रमशः यूय और वय आदेश हो जाते हैं। व्याख्या—युष्मदस्मदोः ।६।२। (युष्मदस्मदोरनादेशे से)। मपर्यन्तस्य ।६।१। (यह अधिकृत है)। यूयवयौ ।१।२। जसि ।७।१। अर्थ —(जसि) जस् परे होने पर (युष्मदस्मदोः) युष्मद् और अस्मद् शब्दों के (मपर्यन्तस्य) म्पर्यन्त भाग के स्थान पर क्रमशः (यूयवयौ) यूय और वय आदेश होते हैं। 'युष्मद्+अम्, अस्मद्+अम्' यहां अम् को स्थानिवद्भाव से जस् मान कर उस के परे होने पर प्रकृतसूत्र द्वारा म्पर्यन्त क्रमशः यूय और वय आदेश हो—'यूय अद् +अम्, वय अद्+अम्'। अब अतो गुणे (२७४) से पररूप करने पर—यूयद+ अम्, वयद्+अम्। पुनः शेषे लोपः (३१३) से अद् भाग का लोप होकर—यूय् +अम् = 'यूयम्', वय्+अम्= 'वयम्' रूप सिद्ध होते हैं। अन्त्यलोपपक्ष में शेषे लोपः (३१३) से जब केवल दकार का लोप होता है, तब अमि पूर्वः (१३५) से पूर्वरूप करने से उक्त रूप सिद्ध होते हैं। द्वितीया के एकवचन में—'युष्मद् + अम्, अस्मद् + अम्'। यहां अग्रिमसूत्र प्रवृत्त होता है— [लघु०] विधि-सूत्रम्—(३१७) त्वमावेकवचने ॥७।२।६७॥ एकस्योक्तावनयोर्मपर्यन्तस्य त्वमौ स्तो विभक्तौ॥ अर्थ —विभक्ति परे होने पर एकत्व कथन में युष्मद् और अस्मद् को म्पर्यन्त त्व और म आदेश हो जाते हैं। व्याख्या—विभक्तौ ।७।१। (अष्टन आ विभक्तौ से)। युष्मदस्मदोः ।६।२। (युष्मदस्मदोरनादेशे से)। मपर्यन्तस्य ।६।१। (यह अधिकृत है)। त्वमौ ।१।२। एक- वचने ।७।१। समास —एकस्य वचनम्—वचनम् = एकवचनम्, तस्मिन् = एकवचने।