लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहलन्त-नपुंसकालिङ्ग-प्रकरणम् ५०६ जाग्रत्, जक्षत्, दरिद्रत् प्रभृति शब्द आते हैं। इन शब्दों को 'शी' में नुम् का आगम प्राप्त नहीं होता । 'शि' में वा नपुंसकस्य (३६४) से विकल्प कर के नुम् हो जाता है। (२) शप् वा श्यन् विकरण के शत्रन्त । भ्वादि और चुरादिगणीय धातुओं से शप्-विकरण तथा दिवादिगणीय धातुओं से श्यन्विकरण हुआ करता है। इन के शत्रन्तों को शी तथा शि दोनों में नित्य नुम् का आगम हो जाता है। यथा - भवत्, भवन्ती, भवन्ति । चोरयत्, चोरयन्ती, चोरयन्ति । दीव्यत्, दीव्यन्ती, दीव्यन्ति । (३) तुदादि, आकारान्त अदादि तथा लुटः सद्वा (८३५) के शत्रन्त । इन से शी में आच्छीनद्योर्नुम् (३६५) द्वारा वैकल्पिक तथा शि में नपुंसकस्य झलचः (३६६) से नित्य नुम् का आगम हो जाता है। यथा - तुदत्, तुदन्ती-तुदती, तुदन्ति । यान्ती-याती, यान्ति । भविष्यत्, भविष्यन्ती-भविष्यती, भविष्यन्ति । (४) उपर्युक्त गणों से भिन्नगणीय धातुओं के शत्रन्त । इस श्रेणी में 'शी' परे नुम् आगम बिलकुल नहीं होता । 'शि' में झलन्तत्वात् नित्य नुम् होता है। (स्वादिगणीय) मुष्णत्, मुष्णती, मुष्णन्ति । (तनादिगणीय) कुर्वत्, कुर्वती, कुर्वन्ति । श्यन्त शप्तन्त शब्द उगित् हुआ करते हैं; अतः स्त्रीत्व की विवक्षा में उगितश्च (१०५) सूत्र से ङीप् प्रत्यय होता है। ङीप् के अनुबन्धों का लोप होकर 'ई' अवशिष्ट रह जाता है। यू स्त्र्याख्यौ नदी (१६४) से 'ई' की नदीसञ्ज्ञा है। तब 'शी' में जैसे २ नित्य वा वैकल्पिक नुम् होता है। वैसे २ नित्य वा वैकल्पिक नुम् 'ई' परे होने पर भी हो आता है। यथा-शप् और श्यन् विकरणीय धातुओं से शी में नित्य नुम् होता है, तो नदीसञ्ज्ञक 'ई' में भी नित्य नुम् हो जायेगा। तथाहि— (नपुंसक 'शी' (औ) में) (नदीसञ्ज्ञक 'ई' अर्थात् स्त्रीलिङ्ग में) श्यन्विकरणीय वा शब्विकरणीय { १ भवन्ती भवन्ती, भवन्त्यौ, भवन्त्यः । नदीवत् २ नमन्ती नमन्ती, नमन्त्यौ, नमन्त्यः । " ३ पतन्ती पतन्ती, पतन्त्यौ, पतन्त्यः । " ४ चोरयन्ती चोरयन्ती, चोरयन्त्यौ, चोरयन्त्यः । " ५ गणयन्ती गणयन्ती, गणयन्त्यौ, गणयन्त्यः । " ६ दीव्यन्ती दीव्यन्ती, दीव्यन्त्यौ, दीव्यन्त्यः । " ७ अस्यन्ती अस्यन्ती, अस्यन्त्यौ, अस्यन्त्यः । " ८ श्राम्यन्ती श्राम्यन्ती, श्राम्यन्त्यौ, श्राम्यन्त्यः । " तुदादिगणीय, आकारान्त अदादिगणीय तथा लुटः सद्वा (८३५) वाले शत्रन्तों से 'शी' में वैकल्पिक नुम् होता है तो 'ई' में भी वैकल्पिक नुम् होगा । तथाहि — तुदादि० { १. तुदन्ती, तुदती { तुदन्ती, तुदन्त्यौ, तुदन्त्यः । नदीवत् { तुदती, तुदत्यौ, तुदत्यः । " { २. लिखन्ती, लिखती { लिखन्ती, लिखन्त्यौ, लिखन्त्यः । " { लिखती, लिखत्यौ, लिखत्यः । "