भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

पृष्ठ 527, कुल 633 में से

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पृष्ठ 527

५१२ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्यां [लघु०] पयः। पयसी। पयांसि। पयसा। पयोभ्याम् ॥ व्याख्या—पयस् (जल वा दूध)। पयः क्षीरं पयोऽम्बु च इत्यमरः। पयस् + सुँ। सुंलुक् होकर रुत्व विसर्ग करने से—पयः। पयस् + औ—पयस् + शी = पयस् + ई = पयसी। पयस् + जस् - पयस् + इ (शि)। नपुंसकस्य झलचः (२३६) से नुँम् का आगम, सान्तमहतः संयोगस्य (३४२) से उपधादीर्घ तथा नश्चापदान्तस्य झलि (७८) से अनुस्वार होकर — पयांसि। पयस् + भ्याम्। यहां ससजुषो रुः (१०५) से रुँत्व, हशि च (१०७) से उत्व तथा आद् गुणः (२७) से गुण होकर—पयोभ्याम्। रूपमाला यथा— प्र० पयः पयसी पयांसि पं० पयसः पयोभ्याम् पयोभ्यः द्वि० ,, ,, ,, ष० ,, पयसोः पयसाम् तृ० पयसा पयोभ्याम् पयोभिः स० पयसि ,, पयस्सु,-स्सु च० पयसे ,, पयोभ्यः सं० हे पयः ! हे पयसी ! हे पयांसि ! । इसी प्रकार निम्नलिखित शब्दों के रूप होते हैं— शब्द—अर्थ शब्द—अर्थ शब्द—अर्थ अनस् = छकड़ा छन्दस् = छन्द रहस् = एकान्त अम्भस् = जल तपस् = तप रहस् = वेग अयस् = लोहा तमस् = अन्धकार रेतस् = वीर्य अर्णस् = जल तरस् = वेग रोधस् = तट अर्शस् = बवासीर तेजस् = तेज वक्षस् = छाती आगस् = अपराध नभस् = आकाश वचस् = वचन उरस् = छाती पाथस् = जल वर्चस् = तेज ऋक्षस् = चहूँटा मनस् = मन वयस् = आयु, पक्षी एधस् = ईंधन महस् = तेज वासस् = कपड़ा एनस् = पाप मदस् = चर्बी शिरस् = सिर ओकस् १ = घर यशस् = यश श्रवस् = कान ओजस् = बल, तेज यादस् = जलजन्तु सरस् = तालाब अहस् = पाप रक्षस् = राक्षस स्रोतस् = झरना चेतस् = चित्त रजस् = धूल सहस् = बल (१०५) की प्रवृत्ति न हो सकेगी क्योंकि वहां सकार तो होगा नहीं षकार होगा। अन्य लोगों का कथन है कि उणादयो बहुलम् (८४८) में 'बहुलम्' ग्रहण के कारण सर्वप्रकार के व्यभिचारों की निवृत्ति हो जाती है कोई दोष नहीं आता। अन्यथा षकारान्त मान कर भी अव्युत्पत्तिपक्ष में 'धनुषा, यजुषा' आदि में प्रत्यय का अवयव न होने से आदेशप्रत्यययोः (१५०) से षत्व न हो सकेगा। १ इसी का कूट प्रश्न पूछा जाता है—कदापुरोकसो भवन्तः ? । 'कदा-अगुः, ओकसो भवन्' यह छेद है (आप घर में कब गये ?)।

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