भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

पृष्ठ 628, कुल 633 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 628

६ “I gratefully acknowledge receipt of a copy of the Vaiya- karana-Bhusana-Sara Your knowledge of the grammar is pro- found and subtle and the world of scholars expect many such good works from your pen.” अर्थात् “आप का व्याकरणविषयक ज्ञान गम्भीर एवं व्यापक है। विद्वत्समाज आप की लेखनी से इस प्रकार की अनेक सुन्दर कृतियों की आशा करता है।” गुरुकुल झज्झर के आचार्य तपोमूर्ति श्रीभगवान्देवजी आर्य लिखते हैं— “आप का परिश्रम स्तुत्य है। छात्रों के लिए इस ग्रन्थ का आर्यभाषानुवाद कर के आपने महान् उपकार किया है। आप को अनेकशः बधाइयां।” बालमनोरमा-भ्रान्ति-दिग्दर्शन [ लेखक - वैद्य भीमसेन शास्त्री M. A. Ph. D. साहित्यरत्न ] श्री भट्टोजिदीक्षित की सिद्धान्तकौमुदी पर श्री वासुदेव दीक्षित की बनाई हुई बालमनोरमा टीका सुप्रसिद्ध छात्रोपयोगी ग्रन्थ है। पिछली अर्धशताब्दी मे इसके कई संस्करण मद्रास, लाहौर, बनारस और दिल्ली आदि महानगरों मे अनेक दिग्गज विद्वानों के तत्त्वाधान में प्रकाशित हो चुके है। परन्तु शोक से कहना पडता है कि इन स्वनामधन्य विद्वान् सम्पादको ने इस ग्रन्थ के साथ जरा भी न्याय नही किया, इसे पढने तक का भी कष्ट नही किया। यही कारण हे कि इस मे अनेक हास्यास्पद और घिनौनी अशुद्धिया दृष्टिगोचर होती है। इस से पठन-पाठन मे बहुत विघ्न उप- स्थित होता है। इस शोधपूर्ण लघु निबन्ध मे बालमनोरमाकार की कुछ सुप्रसिद्ध भ्रान्तियों की सयुक्तिक समीक्षा प्रस्तुत की गई है। आप इस शोधपत्र को पढ़ कर मनोरंजन के साथ-साथ प्रक्रियामार्ग मे अन्धानुकरण न करने तथा सदैव सजग रहने की भी प्रेरणा प्राप्त कर सकते है। इसमे स्थान-स्थान पर विद्वानो की प्रमादपूर्ण सम्पादन कला पर भी अनेक चुभती चुटकियां ली गई हैं। यह निबन्ध प्रकाशको, सम्पादकों, अध्यापकों एवं विद्यार्थियो सब की आंखो को खोलने वाला एक समान उपयोगी हे। हिन्दी मे इस प्रकार का साहसपूर्वक प्रयत्न पहली वार किया गया है। अनेक प्रकार के टाइपों मे मैप्सलीथो कागज पर छपे सुन्दर शोधपत्र का मूल्य—पाच रुपये केवल । प्रत्याहारसूत्रों का निर्माता कौन ? [ लेखक – वैद्य भीमसेन शास्त्री M.A. Ph. D. साहित्यरत्न ] इस शोधपूर्ण लघु निबन्ध मे प्रत्याहार सूत्रों (अइउण् आदि) के निर्माता के विषय में खूब ऊहापोहपूर्वक पूर्ण विचार किया गया है। दर्जनों नये प्रमाणों का युक्ति- युक्त विवेचन पहली बार इस विषय पर प्रस्तुत किया गया है। एक बार इसे पढ़ जाइये आप अन्धविश्वास के घेरे से अपने आपको अवश्य मुक्त पाएंगे। अनेक प्रकार के टाइपों में मैप्सलीथो कागज पर छपे सुन्दर शोधपत्र का मूल्य—पाच रुपये केवल ।