लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ९२ ) लीलावती । माणिक एक १ नीलमणि सतानवे ९७ मुक्ता एक १ हीरा है. चौथेके पास एक १ माणिक एक १ नीलमणि एक १ मोती दो २ हीरा है सबका उपरोक्त मूल्यके अनु- सार जोडनेसे समधन २३३ दोसौ तैंतीस होता है जैसा कि आगे यंत्रमें लिखा है
व्यौपारी. | पहला | दूसरा | तीसरा | चौथा माणिक. | ५ | १ | १ | १ नीलमणि. | १ | ७ | १ | १ मुक्ताफल. | १ | १ | ९७ | १ हीरा. | १ | १ | १ | २
| | पहला | दूसरा | तीसरा | चौथा | माणिक. एकका मू० २४ | संख्या. मूल्य. ५ १२० | संख्या. मूल्य. १ २४ | संख्या. मूल्य. १ २४ | संख्या. मूल्य. १ २४ | नीलमणि. एकका मू० १६ | सं० मू० १ १६ | सं० मू० ७ ११२ | सं० मू० १ १६ | सं० मू० १ १६ | मुक्ताफल. एकका मू० १ | सं० मू० १ १ | सं० मू० १ १ | सं० मू० ९७ ९७ | सं० मू० १ १ | हीरा. एकका मू० ९६ | सं० मू० ९६ | सं० मू० १ ९६ | सं० मू० १ ९६ | सं० मू० २ १९२ | सबका जोड. | २३३ | २३३ | २३३ | २३३ |
इस उदाहरणमें इष्ट कल्पना करना अपनी बुद्धिके अनुसार लिखा है. उसकी रीति यह है कि, रत्नोंमें मनुष्य संख्यासे गुणा करी हुई दोकी संख्या घटाकर जो रत्न शेष रहें उनमेंसे पहली दो राशियोंमें किसी अंकका परिवर्तन लगे तो दे ले. परिवर्तन देनेसे जो अंक आवे उनको परस्पर घात कर ले. घात करनेसे जो अंक आवें उनको जिस अंकका परिवर्तन दिया हो उससे गुणा करे. फिर जो अंक हो उसका एक राशि शोषित रत्नोंमेंकी दोनोंको किसी अंकका परिवर्तन लग सके तो दे, परिवर्तन देनेसे जो अंक आवे उनका परस्पर घात करे और जिस अंकका परिवर्तन दिया हो, उससे गुणा करे, इसी प्रकार जितनी राशि हों, सबसे इसी