लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभूमिका। ( ३ ) कहते हैं कि, भास्कराचार्य्यने अपनी पुत्री लीलावतीकी जन्मकुण्डलीमें बाल- विधवा योग देखकर उसका विवाह नहीं किया और संसारमें उसके नामकी प्रसिद्धि रहनेके लिये उसीके नामसे इस पाटीगणितको बनाया और कोई २ ऐसा भी कहते हैं कि, भास्कराचार्यके कोई सन्तान नहीं थी इस कारण सन्तानके बिना अतिदुःखित अपनी स्त्री लीलावतीका बहुत काल पर्य्यन्त संसारमें नाम रहनेके लिये उसके नामसे यह पाटी गणित रचना कियाथा परन्तु डॉक्टर भाऊदाजीको नाशिकक्षेत्रके समीप जो ताम्रपत्र मिलाहै उससे यह प्रतीत होता है कि भास्करा- चार्यके पुत्रपौत्रादि सब थे उस ताम्रपत्रकी नकल इतिहाससिकोंकी प्रसन्नताके अर्थ लिखते हैं । ताम्रपत्रकी नकल. १ नमो गणाधिपतये-सिद्धि-सुधाकरभूमि-स्य-दू-त्वसंरक्षणानिगगने- चरवास्तोतः । श्लोक-उद्भटबुद्धिर्भट्टे सांख्ये संख्यः स्वतन्त्रधीस्तन्त्रे ॥ वेदेऽनवद्यविद्योऽनलपः शिल्पादिषु कलासु ॥ १ ॥ स्वच्छन्दोऽथ च्छन्दसि शास्त्रे वैशेषिके विशेषज्ञः ॥ यः श्रीप्रभाकरसमः प्रभाकरदर्शने कविः काव्ये ॥ २ ॥ बहुगुणगणितप्रभृतिस्कन्धत्रितये त्रिनेत्रसमः ॥ विबुधाभिवन्दितपदो जयति श्रीभास्कराचार्य्यः ॥ ३ ॥ श्रीमद्यदुवंशाय स्वस्त्यस्तु समस्तवस्तुसहिताय ॥ विश्वं यत्र त्रातुं जातो विष्णुः स्वतन्त्रस्तु ॥ ४ ॥ गर्जद्गूर्जरकुञ्जरोत्कटघटासंघट्टकण्ठीरवो लाटोरस्ककपाटपाटनपटुः कर्णाटहृत्कण्टकः ॥ श्रीमान् भिल्लमभूपतिः समभवद्भूपालचूडामणि- स्त्रस्तात्तन्ध्रपुरन्ध्रिकान्तसुखहृच्छ्रीजैत्रपालोऽभवत् ॥ ५ ॥