लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
पृष्ठ 117, कुल 268 में से
संदर्भ में पढ़ेंमिश्रकव्यवहारः । (१०१) अङ्क $\frac{२}{५}$ के भाज्य २ से गुणा किया तब ३० तीस हुआ, इसमें भाजक ५ पांचका भाग लिया तब ६ ६ लब्धि पाँचवाँ सिद्ध अङ्क हुआ. फिर इसके आगेके अङ्क $\frac{१}{६}$ के भाज्यसे गुणा किया तब ६ ६ हुआ. भाजकका इसमें भाग दिया तब १ एक छठा सिद्ध अङ्क लब्धि हुआ. इस प्रकार सिद्ध अङ्क (एक आदि गुरुके भेद) यह ६ । १५ । २० । १५ । ६ । १ हुए, इनमें सर्व लघुका भेदमें एक और मिला दिया तब गायत्रीके पादमें प्रस्तार करनेसे ६४ चौंसठ भेद हुए ॥ अथवा $\frac{\xi}{१}\ \frac{\varphi}{२}\ \frac{\gamma}{३}\ \frac{३}{\gamma}\ \frac{२}{\varphi}\ \frac{१}{\xi}$ यहाँ ऊपरके भाज्य सब अंकोंको पहले २ से आगे २ को गुणा किया तब अपने ऊपरके गुणित अंकमें अपने २ नीचेके अङ्कोंको भी पहले २ आगेके अङ्कको गुणा करके नीचे रखता जाय, फिर नीचेके अङ्कका भाग दे अर्थात् पहला अङ्क तो छ $\frac{\xi}{१}$ है इससे दूसरे अङ्क ५ को गुणा किया और नीचेकी पंक्तिमें पहले १ से दूसरे २ को गुणा किया तब $\frac{३०}{२}$ ऐसा हुआ. फिर तीसरे आगेके अङ्क चारको गुणा किया तब तब तीसरा अङ्क $\frac{१२०}{\xi}$ हुआ इस प्रकार अन्ततक किया तब $\frac{\xi}{१}\ \frac{३०}{२}\ \frac{१२०}{\xi}\ \frac{३६०}{२४}\ \frac{७२०}{१२०}\ \frac{७२०}{७२०}$ ऐसा हुआ फिर नीचेके अंकका ऊपरकेमें सब जगह भाग दिया तब क्रमसे वही ६।१५।२०।१५।६।१ आदि गुरुके भेद हुए एक सहित सर्व लघुको जोडा तब वही सब इकट्ठे ६४ चौंसठ भेद हुए. इसी प्रकार जब चारों पादोंको मिलाके भेद निकाले तब सम्पूर्ण गायत्री छन्दके १६७७७२१६ इतने भेद हुए. इसी प्रकार और छन्दोंके प्रस्तारमें भी जानना ॥ खण्डमेरुके विषयमें जो काम इस रीतिका पडता है सो दिखाते हैं.
${c} | ० |
\hline | १ | १ |
\hline | १ | २ | १ |
\hline | १ | ३ | ३ | १ |
\hline | १ | ४ | ६ | ४ | १ |
\hline | १ | ५ | १० | १० | ५ | १ |
\hline | १ | ६ | १५ | २० | १५ | ६ | १ | $