लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १७२ ) लीलावती । लम्बके योगसे उसके नीचेके जो दो खण्ड हैं उनके प्रमाण और कर्णोंके योगसे जो लम्ब डाला है उसका प्रमाण और उसी लम्बकी आबाधा भी कहो और जो पहिले भुज कहे हैं जिस प्रकार उनको अपने मार्गसे सीधा बढाकर दोनोंके योगसे सूची बन जाय फिर उस सूचीके अग्रभागसे लम्ब डालकर उस लम्बका प्रमाण तथा उस लम्बकी आबाधाओंका प्रमाण भी कहो तथा हे गणितके जाननेवाले ! यदि इस क्षेत्रमें प्रवीण हो तो जो जो प्रश्न किया है वह सब कहो और सूची भुजका प्रमाण भी क्या होगा सो कहो ॥ २२ ॥ २३ ॥ भूमानम् ३०० मुखम् १२५ बाहू २६० । १९५ कर्णौ २८० । ३१५ लम्बौ १८९।२२४ फैलाव-यहां भूमिका प्रमाण ३०० है, मुखका प्रमाण १२५ है, दोनों भुजाओंका प्रमाण २६० । १९५ है, दोनों कर्णोंका प्रमाण २८० ३१५ है डाले हुए दोनों लम्बोंका प्रमाण १८९। २२४ है, उसीका स्वरूप दिखाते हैं ॥ अथ सन्ध्याद्यानयनाय करणसूत्रं वृत्तद्वयम्- अब संधि-पीठ-कर्ण-नीचेके खण्ड लानेकी रीति २ श्लोकमें लिखते हैं- लम्बस्तदाश्रितबाहोर्मध्यं संध्याख्यमस्य लम्बस्य ॥ सन्ध्यूना भूः पीठं साध्यं यस्याधरं खण्डम् ॥ ३५ ॥