भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

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कुट्टकव्यवहारः । (२२३) दो राशि हुई; इसमें ऊपरकी राशिको दृढभाज्य १७ से तष्टा और नीचेकी राशिको दृढ हरसे तष्टा तो शेष अंक मिले |६ ल| इसमें ऊपरकी राशि लब्धि और नीचेकी |५ गु| गुण है. यद्यपि प्रश्न गुणके अंकका ही था तथापि प्रसङ्गसे लब्धि भी आजाती है यह जो गुणक मिला है, सो सबसे छोटा है; इसको छोडकर और कोई छोटा गुणक अंक नहीं मिलेगा और यह लब्धिका अंक भी सबसे छोटा है, यह वही गुणक अंक ५ मिला है, जिससे दोसौसे इक्कीसको गुणा कर पैंसठ मिलाये जायँ और फिर १९५को भाग दिया जाय तो अंक निःशेष हो जाता है; इस गुण लब्धिसे दूसरे भी गुणलब्धि आगे कही हुई "इष्टाहतस्वस्वहरेण युक्तः"-पहली रीतिसे सबसे छोटा जो गुणलब्धि मिली है उनमें किसी इष्टसे गुणेहुए अपने २ तक्षक अंकको जोडनेसे पहलेलाई हुई गुणलब्धिसे दूसरी गुणलब्धि मिलती है अर्थात् किसी इष्टसे गुणा करे हुए भाज्यको लब्धिमें जोडै और उसी इष्टसे गुणा करे हुए भाजकको गुणमें जोडे इस रीतिसे अनेक प्रकारकी गुणलब्धि मिलती है; जिस प्रकार यहाँ पहली रीतिसे लाई हुई लब्धि ६ है और गुण ५ है और दृढभाज्य १७ और दृढभाजक १५ है; यह दृढभाज्यभाजक लब्धि और गुणके तक्षक हैं; इन १७ । १५ को इष्ट १ से गुणा किया तब लब्धिगुणमें ६ । ५ जोडा तो २३ । २० हुए, यहां जो गुणक अंक २० मिला है उससे भी २२१ को गुणा कर ६५ जोडे और १९५ का भाग दिया तब निःशेष हो जाता है; इसी प्रकार २ को इष्ट माननेसे ३९ । ४०, तीनको इष्ट मानने से ५० । ५७ इसी प्रकार नाना प्रकारके इष्ट माननेसे गुणलब्धि नाना प्रकारके होते हैं । कुट्टकान्तरे करणसूत्रंवृत्तम्- कुट्टक करनेकी और रीति श्लोक एक- भवति कुट्टविधेर्युतिभाज्ययोः समपवर्तितयोरपि वा गुणः ॥ भवति यो युतिभाजकयोः पुनः स च भवेदपवर्तनसंगुणः॥७०॥ अन्वयः-समपवर्तितयोः युतिभाज्ययोः अपि कुट्टविधेः गुणः भवति वा यः समपवर्तितयोः युतिभाजकयोः गुणः भवति स च पुनः अपवर्तनसंगुणः गुणः भवेत् ॥ ७० ॥ अर्थः-जिस प्रकार पहले भाज्य भाजक और क्षेप इन तीनोंमें अपवर्तन देकर दृढभाज्य, भाजक और क्षेप बनाके गुणलब्धि मिलती है; तिसी प्रकारके केवल भाज्य क्षेपमें भी अपवर्तन देकर पहली रीतिसे वल्ली बनाकर कही हुई रीतिसे गुण और लब्धि लावे, यदि भाजक और क्षेपमें अपवर्तन देकर गुणका साधन करा हो