लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ
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( ३२ ) लीलावती । बारहमें अंश १ एकको घटाया तब ११ ग्यारह रहे. इनको अंशके स्थानमें लिखा और हर वही १२ रहा यही पूर्वोक्त राशिका भागापवाह है ॥ दूसरा उदाहरण. अत्रोद्देशकः-इसी भागानुबन्ध भागापवाहके विषयमें उदाहरण- अंघ्रिः स्वत्र्यंशयुक्तः स निजदलयुतः कीदृशः कीदृशौ द्वौ त्र्यंशौ स्वाष्टांशहीनौ तदनु च रहितौ स्वत्रिभिः सप्तभागैः ॥ अर्द्धं स्वाष्टांशहीनं नवभिरथ युतं सप्तमांशैः स्वकीयैः कीदृक्स्याद्ब्रूहि वेत्सि त्वमिह यदि सखेऽशानुबन्धापवाहौ ॥ ४ ॥ अन्वयः-हे सखे ! यदि अंशानुबन्धापवाहौ वेत्सि तर्हि इह अंघ्रिः स्वत्र्यंशयुक्तः स निजदलयुतः कीदृशः स्यात् । तथा त्र्यंशौ द्वौ स्वाष्टांशहीनौ तदनु च स्वत्रिभिः सप्तभागैः रहितौ कीदृशौ स्याताम् । तथा अर्धं स्वाष्टांशहीनम् अथ नवभिः स्वकीयैः सप्तमांशैः युतं कीदृक् स्यात् । इति त्वं ब्रूहि ॥ ४ ॥ अर्थः-हे मित्र ! जो भागानुबन्ध तथा भागापवाह जानते हो, तो भागानुबन्ध तथा भागापवाहके अनुसार एकका १/४ चतुर्थांश अपने तृतीयांश १/३ संयुक्त जो अंक उसके १/२ अर्द्धांशसे युक्त कैसा होता है तथा तीसरे भाग दो २/३ को अपने १/८ अष्टमांशसे हीन करनेसे जो अंक हुआ उसको अपने सातवें ३/७ भाग तीनसे हीन किया तब क्या हुआ, तथा आधे १/२ को अपने अष्टमांशसे हीन करनेसे जो अंक शेष होता है, उससे अपने सातवें भाग ९ नौंसे युक्त किया तब कैसा रूप होगा यह तुम कहो ॥ ४ ॥ न्यासः- १/४ २/३ १/२ १/३ १/८ १/८ } सवर्णिते जातं क्रमेण. १/२ ३/७ ९/७ १/२ १/३ १/२ फैलाव-इस राशिमें सबसे तलेका हर २ है उससे सबसे ऊपरके हर ४ चारको न्यासः गुणा किया तब ८ आठ हो गया इसको सबसे ऊपरके हरके स्थानमें १ रखा और यहाँ नीचेको अंशयुक्त करना है, इस कारण नीचेके हरमें
४ अपना अंश १ एकको जोडा तब ३ तीन हुआ इससे सबसे ऊपरके १ अंश १ एकको गुणा किया तब ३/८ ऐसा हुआ फिर सबसे नीचेके हर
३ ३ तीनसे ऊपरके हरको ३/८ गुणा तब २४ चौबीस हुआ. उसको १ ऊपरके हरके स्थानमें रक्खा और यहां भी नीचेका अंशयुक्त करना है.
२ इस कारण नीचेके हरमें अपना अंश १ एक जोडा तब ४ चार हुआ इससे सबसे ऊपरके अंशको गुणा किया तब १२/२४ ऐसा रूप हुआ, इसमें १२ बारहका अपवर्तन दिया तब १/२ ऐसा रूप हुआ यही उत्तर है ॥