भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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(५४) लीलावती। अर्थ:-वर्गान्तरमें राशिके अन्तरका भाग दे जो लब्धि हो उसीको योगराशि जाने. फिर ऊपरकी कही हुई विधिके अनुसार क्रिया करनेसे राशि मालूम होती हैं. उद्देशक:-उदाहरण:- राश्योर्ययोर्वियोगोऽष्टौ तत्कृत्योश्च चतुःशती ॥ विवरं वद तौ राशी शीघ्रं गणितकोविद् ॥ १ ॥ अन्वयः-हे गणितकोविद् ! ययोः राश्योः वियोगः अष्टौ । तत्कृत्योः चतुःशती विवरम् । तौ राशी शीघ्रं वद ॥ १ ॥ अर्थः-हे गणितचातुरीधुरीण ! जिन राशियोंका अन्तर ८ आठ होता है और दोनोंके वर्गका अन्तर करनेसे चारसौ ४०० होता है तो उन दोनों राशियोंको बताओ वह कौन हैं ? ॥ १ ॥ न्यासः-राश्यन्तरम् ८ कृत्यन्तरम् ४०० जातौ राशी २१। २९ ॥ फैलाव-उपरोक्त नियमानुसार वर्गान्तर ४०० चारसौमें राशिके अन्तर ८ आठका भाग दिया तब ५० पचास लब्धि हुए. यही योगराशि है. अब संक्रमण रीतिके सूत्रके अनुसार ५० पचासमें आठको घटाया तब बयालीस हुए.इसका आधा किया तब २१ इक्कीस हुए. यह एक राशि हुआ, फिर ५० पचासमें ८ आठ जोडा तब ५८ अट्ठावन हुआ. इसका आधा किया तब २९ उनतीस हुए. यह दूसरा राशि हुआ. अर्थात् जिनका अन्तर ८ होता है और वर्गान्तर ४०० होता है वह २१। २९ दोनों राशि यही हैं. क्योंकि २९ उनतीसमें २१ : इक्कीस घटानेसे ८ शेष रहता है यही राश्यंतर है और इक्कीसका वर्ग करनेसे ४४१ चारसौ इकतालीस होते हैं और २९ उनतीसका वर्ग ८४१ आठसौ इकतालीस होते हैं, इनका अन्तर करनेमें ४०० चारसौ शेष होता है यही वर्गान्तर है ॥ अथ किञ्चिद्वर्गकर्म्म प्रोच्यते. अब कुछ वर्ग कर्म्मकी रीति लिखते हैं- इष्टकृतिरष्टगुणिता व्येका दलिता विभाजितेष्टेन ॥ एकः स्यादस्य कृतिर्दलिता सैका परो राशिः॥ १२ ॥ अन्वयः-इष्टकृतिः अष्टगुणिता व्येका दलिता इष्टेन विभाजिता एकः स्यात् । अस्य कृतिः दलिता सैका अपरः राशिः स्यात् ॥ १२ ॥