माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 223, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । (२०५) नाभिके पास बहुत ऊंचा होय, चारों ओर तनासा मालूम होय, पानीकी पोट भरीसी होय जैसे पानीसे भरी पखालमें जल हलै है उसी प्रकार हले, गडगड शब्द- करे, कांपे इनको जलोदर अर्थात् जलन्धर कहते हैं ॥ साध्यासाध्यविचार । जन्मनैवोदरं सर्वं प्रायः कृच्छ्रतमं विदुः ॥ २६ ॥ बलिनस्तदजाताम्बु यत्नसाध्यं नवोत्थितम् । सर्व प्रकारके उदर जन्मसे ही प्रायः अत्यन्त कष्टसाध्य होते हैं । बलवान् पुरु- षके नवीन प्रकट भया हो और उसमें पानी नहीं प्रगट भया हो ऐसा बडे यत्नसे साध्य होय ॥ पानी नहीं प्रगट भया हो ऐसे उदरके लक्षण चरकमें कहे हैं- अशोथमरुणाभासं सशब्दं नातिभारिकम् ॥ २७ ॥ सदा गुडगुडायन्तं शिराजालगवाक्षितम् । नाभिं विष्टभ्य पायौ तु वेगं कृत्वा प्रणश्यति ॥ २८ ॥ हृद्वंक्षणकटीनाभिगुदं प्रत्येकशूलिनः । कर्कशं सृजतो वातं नातिमन्दे च पावके ॥ २९ ॥ लालया विरसे चास्ये मूत्रेऽल्पे संहते विशि । अजातोदकमित्येतैर्युक्तं विज्ञाय लक्षणैः ॥ ३० ॥ जातोदकके लक्षण भी चरकमें इस प्रकार कहे हैं सो लिखते हैं- पयःपूर्णा दृतिरिव क्षोभे शब्दकरं मृदु । अप्रव्यक्तशिरं शूनं नितान्तमुदरं महत् ॥ ३१ ॥ आलस्यमास्यवैरस्यं मूत्रं बहुशकृत्स्रुतम् । जातोदकस्य लिङ्गं स्यान्मंदोऽग्निः पाण्डुतापि च ॥३२॥ इति। पक्षाद्वद्धगुदं तूर्ध्वं सर्वं जातोदकं तथा । प्रायो भवत्यभावाय च्छिद्रान्त्रं चोदरं नृणाम् ॥ ३३ ॥ बद्धगुदोदर १५ दिवसके पिछाडी असाध्य होता है, उसी प्रकार सब प्रकारके उदक (पानी) उत्पन्न होनेसे नाशकारक होता है, और छिद्रान्त्रोदर यह प्रायः नाशक होता है । कदाचित् शल्य अथवा शस्त्रचिकित्सा जैसी होनी चाहिये ऐसी होय तो उदक (पानी) प्रगट भया उदररोग छिद्रान्त्र अथवा बद्धगुद साध्य होता है. यह प्रायः इस पदसे सूचना करी ॥