भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( २०७ ) वह सूजन कारणभेदसे कार्यभेद होकर ९ नौ प्रकारका होय है । यथा-अलग अलग दोषोंसे ३, द्वन्द्वज ३, सन्निपातज १, अभिघातज १ और विषसे १ ऐसे सब मिलकर नौ प्रकारका शोथ रोग भया ॥ शोथका निदान । शुद्धामया भक्तकृशा बलानां क्षाराम्लतीक्ष्णोष्णगुरूपसेवा । दध्याममृच्छाकविरोधिपिष्टगरोपसृष्टान्ननिषेवणं च ॥ ३ ॥ अर्शांस्यचेष्टा वपुषो ह्यशुद्धिर्मर्माभिघातो विषमा प्रसूतिः । मिथ्योपचारः प्रतिकर्मणां च निजस्य हेतुः श्वयथोः प्रदिष्टः॥४॥ वमन आदि, ज्वरादिक, अभोजन ( विगुणभोजन ) इनसे जो कृश और बल- हीन मनुष्योंके क्षारादिकका सेवन सूजनका कारण होय है । तहां नोन, खटाई, तीखी, उष्ण, भारी वस्तुओंका सेवन, दही अपक्क, मिट्टी, निषिद्ध साग, विरुद्ध ( क्षीरमत्स्यादिक ), पिष्ठी या मैदा वगैरहकी वस्तु, संयोगजविषसे दूषित भये अन्नके सेवन करनेसे, बवासीर, दण्डकसरतके न करनेसे, शोधनके योग्य दोषोंके न शोध- नेसे, हृदयादि दोषज कर्मोंके उपघातसे, कच्चा गर्भपात होना, वमनादि पञ्चकर्मोंका मिथ्यायोग ये सर्वदोषज सूजनके कारण कहे हैं ॥ शोथका पूर्वरूप । तत्पूर्वरूपं दवथुः शिरायामोऽङ्गगौरवम् ॥ ५ ॥ सन्ताप, नसोंकी तननेके समान पीडा, देह भारी ये लक्षण सूजन होनेवाले पुरुषके होते हैं ॥ शोथका सामान्य लक्षण । सगौरवं स्यादनवस्थितत्वं सोत्सेधमूष्मा च शिरातनुत्वम् । सलोमहर्षश्च विवर्णता च सामान्यलिङ्गं श्वयथोः प्रदिष्टम् ॥ ६ ॥ अंग भारी हो, चित्तमें स्वस्थता न होना, ऊंची सूजन और दाह, नस पतली होंजायँ, रोमांच और देहका रंग बदल जाय ये सूजनके सामान्य लक्षण हैं ॥ वातजशोथके लक्षण । चलस्तनुत्वक्परुषोऽरुणोऽसितः ससुप्तिहर्षार्तियुतोऽनिमित्ततः । प्रशाम्यति प्रोन्नमतिप्रपीडितो दिवाबलीस्याच्छ्वयथुः समीरणत्॥७॥ १ बाह्य हेतुसे उत्पन्न हुआ जो मर्मोंका उपघात वह तो आगन्तुज शोथकाही हेतु है ।