माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २०८ ) माधवनिदान । बादीकी सूजन चञ्चल, त्वचा पतली हो जाय, कठोर हो, लाल, काली तथा त्वचा शून्य पडजाय, भिन्न भिन्न वेदना हों अथवा रोमांच और पीडा हो, कदा- चित् निमित्तके बिना शांति हो जाय, उस सूजनके दाबनेसे तत्क्षण ऊपरको उठ आवे, दिनमें जोर बहुत करे ॥ पित्तशोथके लक्षण । मृदुः सगन्धोऽसितपीतरागवान् भ्रमज्वरस्वेदतृषामदान्वितः । य उष्यते स्पर्शरुगक्षिरागकृत्स पित्तशोथो भृशदाहपाकवान् ॥ ८ ॥ पित्तकी सूजन नरम, कुछ दुर्गन्धयुक्त, काली, पीली और लाल होय, उसके होनेसे भ्रम, ज्वर, पसीना, प्यास और मस्तपना ये लक्षण होयँ, दाह होय, हाथ लगानेसे दूखे, इसीसे नेत्र लाल हों, उसमें अत्यन्त दाह तथा पाक होय ॥ कफजशोथके लक्षण । गुरुः स्थिरः पाण्डुररोचकान्वितः प्रसेकनिद्रावमिवाह्निमान्द्यकृत् । सकृच्छ्रजन्मप्रशमो निपीडितो नचोन्नमेद्रात्रिबली कफात्मकः ॥९॥ कफकी सूजन भारी, स्थिर, पीली होय है, इसके योगसे अन्नद्वेष, लारौंका गिरना, निद्रा, वमन, मन्दाग्नि ये लक्षण होयँ तथा इस सूजनकी उत्पत्ति और नाश बहुतकालमें होय, इसको दबानेसे ऊपरको नहीं उठे, रात्रिमें इसकी प्रबलता हो ॥ द्वन्द्वज और सन्निपातज शोथके लक्षण । निदानाकृतिसंसर्गाच्छ्वयथुः स्याद् द्विदोषजः । सर्वाकृतिः संनिपाताच्छोथो व्यामिश्रलक्षणः ॥ १० ॥ दो दोषोंका लक्षण और कारण एकत्र मिलनेसे द्वन्द्वज शोथ जानना और सन्नि- पातसे सूजन होय उसमें वातादिक तीनों दोषोंके लक्षण होते हैं ॥ अभिघातजशोथके लक्षण । अभिघातेन शस्त्रादिच्छेदभेदक्षतादिभिः । हिमानिलोदध्यनिलैर्भल्लातकपिकच्छुजैः ॥ ११ ॥ रसैः शुकैश्च संस्पर्शाच्छ्वयथुः स्याद्विसर्पवान् । भृशोष्मा लोहिताभासः प्रायशः पित्तलक्षणः ॥ १२ ॥ काष्ठादिककी चोट लगनेसे, शस्त्रादिकसे छेदन होनेसे, पत्थर आदिसे फूटनेसे अथवा घावके होनेसे, आदि शब्दसे लकडी आदिके प्रहार, शीतल पवन लगनेसे CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA