माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 395, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ३७७ ) दुष्ट शुक्र आठ प्रकारका है-फेनिल अर्थात् झागवाला, पतला, रूखा, विवर्ण, ( खोटे रंगका ) पूति ( सडा ), पिच्छिल ( गाढा ) और धातुके साथ मिला भया तथा अवसादि ये आठ भेद हुए ॥ वातदूषित शुक्रके लक्षण । वातेन फेनिलं शुष्कं कृच्छ्रेण पिच्छिलं तनु । भवत्युपहतं शुक्रं न तद्गर्भाय कल्पते ॥ ८ ॥ बादीसे शुक्र झागवाला, सूखा, कुछ गाढा और थोडा तथा क्षीण हो । यह गर्भके अर्थका नहीं है ॥ पित्तदूषित शुक्रके लक्षण । सनीलमथवा पीतमत्युष्णं पूतिगंधि च । दहेल्लिङ्गं विनिर्याति शुक्रं पित्तैश्च दूषितम् ॥ ९ ॥ पित्तसे दूषित शुक्र नीला, अत्यन्त गरम होता है उसमें बुरी वास आवे और जब निकले तब लिंगमें दाह होवे ॥ कफदूषित शुक्रके लक्षण । श्लेष्मणा रुद्धमार्गं तु भवत्यत्यर्थपिच्छिलम् । कफसे शुक्र शुक्रवहा नाडियोंके मार्ग रुकनेसे अत्यन्त गाढा होजाता है ॥ स्त्रियमत्यर्थगमनादभिघातात्क्षयादपि । शुक्रं प्रवर्तते जन्तोः प्रायेण रुधिरान्वयम् ॥ १० ॥ अत्यन्त स्त्रीगमन करनेसे, चोट लगनेसे, मनुष्यके रुधिरसंयुक्त वीर्य निकलता है॥ कृच्छ्रेण याति ग्रथितमवसादि तथाष्टमम् । इति दोषाः समाख्याताः शुक्रस्याष्टौ सलक्षणाः ॥ ११ ॥ अष्टम जो अवसादि शुक्र है सो बडी कठिनतासे गांठके समान निकलता है, शुक्रके आठ दोष कहे हैं ॥ शुद्धशुक्रके लक्षण । स्निग्धं घनं पिच्छिलं च मधुरं चाविदाहि च । रेतः शुद्धं विजानीयात्स्निग्धं स्फटिकसन्निभम् ॥ १२ ॥ सचिक्कण, गाढा, पिच्छिल ( मलाईके समान ), मीठा, दाहरहित और जो स्निग्ध स्फटिक मणिके समान होय ये शुद्धवीर्यके लक्षण हैं ॥ सुश्रुतसे-शुक्रदोषनिदान । वातपित्तश्लेष्मशोणितकुणपगन्ध्यनलपग्रंथिपूतिपूयक्षीणरेतसः