महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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इसी मार्कण्डेय-समागममें पुराणोंकी अनेक कथाएँ, राजा इन्द्रद्युम्नका उपाख्यान तथा धुन्धुमारकी कथा भी है ।। १९३ ।। पतिव्रतायाश्चाख्यानं तथैवाङ्गिरसं स्मृतम् । द्रौपद्याः कीर्तितश्चात्र संवादः सत्यभामया ।। १९४ ।। पतिव्रताका और आंगिरसका उपाख्यान भी इसी प्रसंगमें है। द्रौपदीका सत्यभामाके साथ संवाद भी इसीमें है ।। १९४ ।। पुनर्द्वैतवनं चैव पाण्डवाः समुपागताः । घोषयात्रा च गन्धर्वैर्यत्र बद्धः सुयोधनः ।। १९५ ।। तदनन्तर धर्मात्मा पाण्डव पुनः द्वैतवनमें आये। कौरवोंने घोषयात्रा की और गन्धर्वोंने दुर्योधनको बन्दी बना लिया ।। १९५ ।। ह्रियमाणस्तु मन्दात्मा मोक्षितोऽसौ किरीटिना । धर्मराजस्य चात्रैव मृगस्वप्ननिदर्शनम् ।। १९६ ।।