महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंततो याज्यनिमित्ते तु विश्वामित्रवसिष्ठयोः । वैरमासीत् तदा तं तु विश्वामित्रोऽन्वपद्यत ॥ १५ ॥ उन्हीं दिनों यजमानके लिये विश्वामित्र और वसिष्ठमें वैर चल रहा था। उस समय विश्वामित्र राजा कल्माषपादके पास आये ॥ १५ ॥
तयोर्विवदतोरेवं समीपमुपचक्रमे । ऋषिरुग्रतपाः पार्थ विश्वामित्रः प्रतापवान् ॥ १६ ॥ अर्जुन! जब राजा तथा ऋषिपुत्र दोनों इस प्रकार विवाद कर रहे थे, उग्रतपस्वी प्रतापी विश्वामित्र मुनि उनके निकट चले गये ॥ १६ ॥
ततः स बुबुधे पश्चात् तमृषिं नृपसत्तमः । ऋषेः पुत्रं वसिष्ठस्य वसिष्ठमिव तेजसा ॥ १७ ॥ तदनन्तर नृपश्रेष्ठ कल्माषपादने वसिष्ठके समान तेजस्वी वसिष्ठ मुनिके पुत्र उन महर्षि शक्तिको पहचाना ॥ १७ ॥
अन्तर्धाय तदाऽऽत्मानं विश्वामित्रोऽपि भारत । तावुभावतिचक्राम चिकीर्षन्नात्मनः प्रियम् ॥ १८ ॥ भारत! तब विश्वामित्रजीने भी अपनेको अदृश्य करके अपना प्रिय करनेकी इच्छासे राजा और शक्ति दोनोंको चकमा दिया ॥ १८ ॥