महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 14, कुल 2256 में से
संदर्भ में पढ़ें१२८- भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा १२९- कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा १३०- द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी बीटा और अँगूठिको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना १३१- द्रोणाचार्यद्वारा राजकुमारोंकी शिक्षा, एकलव्यकी गुरुभक्ति तथा आचार्यद्वारा शिष्योंकी परीक्षा १३२- अर्जुनके द्वारा लक्ष्यवेध, द्रोणका ग्राहसे छुटकारा और अर्जुनको ब्रह्मशिर नामक अस्त्रकी प्राप्ति १३३- राजकुमारोंका रंगभूमिमें अस्त्र-कौशल दिखाना १३४- भीमसेन, दुर्योधन तथा अर्जुनके द्वारा अस्त्र-कौशलका प्रदर्शन १३५- कर्णका रंगभूमिमें प्रवेश तथा राज्याभिषेक १३६- भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान १३७- द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना १३८- युधिष्ठिरका युवराजपदपर अभिषेक, पाण्डवोंके शौर्य, कीर्ति और बलके विस्तारसे धृतराष्ट्रको चिन्ता १३९- कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश
(जतुगृहपर्व)
१४०- पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता १४१- दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे पाण्डवोंको वारणावत भेज देनेका प्रस्ताव १४२- धृतराष्ट्रके आदेशसे पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा १४३- दुर्योधनके आदेशसे पुरोचनका वारणावत नगरमें लाक्षागृह बनाना १४४- पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा तथा उनको विदुरका गुप्त उपदेश १४५- वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत १४६- विदुरके भेजे हुए खनकद्वारा लाक्षागृहमें सुरंगका निर्माण १४७- लाक्षागृहका दाह और पाण्डवोंका सुरंगके रास्ते निकल जाना १४८- विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गंगाजीके पार उतारना