महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंऋक्सामयजुषां वेत्ता न्यायवृत्तान्तकोविदः ।। ऋजुरारोहवाञ्छुक्लो भूयिष्ठपथिकोऽनघः । श्लक्ष्णया शिखयोपेतः सम्पन्नः परमत्विषा ।। अवदाते च सूक्ष्मे च दिव्ये च रुचिरे शुभे । महेन्द्रदत्ते महती बिभ्रत् परमवाससी ।। प्राप्य दुष्प्रापमन्येन ब्रह्मवर्चसमुत्तमम् । भवने भूमिपालस्य बृहस्पतिरिवाप्लुतः ।।
उन्होंने धर्म-बलसे परात्पर परमात्माका ज्ञान प्राप्त कर लिया है। वे शुद्धात्मा, रजोगुणरहित, शान्त, मृदु तथा सरल स्वभावके ब्राह्मण हैं। वे देवता, दानव और मनुष्य सबको धर्मतः प्राप्त होते हैं। उनका धर्म और सदाचार कभी खण्डित नहीं हुआ है। वे संसारभयसे सर्वथा रहित हैं। उन्होंने सब प्रकारसे विविध वैदिक धर्मोंकी मर्यादा स्थापित की है। वे ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेदके विद्वान् हैं। न्यायशास्त्रके पारंगत पण्डित हैं। वे सीधे और ऊँचे कदके तथा शुक्ल वर्णके हैं। वे निष्पाप नारद अधिकांश समय यात्रामें व्यतीत करते हैं। उनके मस्तकपर सुन्दर शिखा शोभित है। वे उत्तम कान्तिसे प्रकाशित होते हैं। वे देवराज इन्द्रके दिये हुए दो बहुमूल्य वस्त्र धारण करते हैं। उनके वे दोनों वस्त्र उज्ज्वल, महीन, दिव्य, सुन्दर और शुभ हैं। दूसरोंके लिये दुर्लभ एवं उत्तम ब्रह्मतेजसे युक्त वे बृहस्पतिके समान बुद्धिमान् नारदजी राजा युधिष्ठिरके महलमें उतरे।
संहितायां च सर्वेषां स्थितस्योपस्थितस्य च । द्विपदस्य च धर्मस्य क्रमधर्मस्य पारगः ।। गाथासामानुधर्मज्ञः साम्नां परमवल्गुनाम् । आत्मना सर्वमोक्षिभ्यः कृतिमान् कृत्यवित् तथा ।। योक्ता धर्मे बहुविधे मनो मतिमतां वरः । विदितार्थः समग्रैश्च छेत्ता निगमसंशयान् ।। अर्थनिर्वचने नित्यं संशयच्छिदसंशयः । प्रकृत्या धर्मकुशलो नानाधर्मविशारदः ।। लोपेनागमधर्मेण संक्रमेण च वृत्तिषु । एकशब्दांश्च नानार्थानैकार्थांश्च पृथक्छुमतीन् ।। पृथगर्थाभिधानांश्च प्रयोगाणामवेक्षिता ।।
संहिताशास्त्रमें सबके लिये स्थित और उपस्थित मानवधर्म तथा क्रमप्राप्त धर्मके वे पारगामी विद्वान् हैं। वे गाथा और साममन्त्रोंमें कहे हुए आनुषंगिक धर्मोंके भी ज्ञाता हैं तथा अत्यन्त मधुर सामगानके पण्डित हैं। मुक्तिकी इच्छा रखनेवाले सब लोगोंके हितके लिये नारदजी स्वयं ही प्रयत्नशील रहते हैं। कब किसका क्या कर्तव्य है, इसका उन्हें पूर्ण ज्ञान है। वे बुद्धिमानोंमें श्रेष्ठ हैं और मनको नाना प्रकारके धर्ममें लगाये रखते हैं। उन्हें जानने