भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 1903

कुछ कालके पश्चात् पिताकी आज्ञा पाकर वे अपनी विमाता महारानी कैकेयीका प्रिय करनेकी इच्छासे वनमें चले गये।

यः समाः सर्वधर्मज्ञश्चतुर्दश वने वसन् ।
लक्ष्मणानुचरो रामः सर्वभूतहिते रतः ॥
चतुर्दश वने तप्त्वा तपो वर्षाणि भारत ।
रूपिणी यस्य पार्श्वस्था सीतेत्यभिहिता जनैः ॥

वहाँ सब धर्मोंके ज्ञाता और समस्त प्राणियोंके हितमें तत्पर श्रीरामचन्द्रजीने लक्ष्मणके साथ चौदह वर्षोंतक वनमें निवास किया। भरतवंशी राजन्! चौदह वर्षोंतक उन्होंने वनमें तपस्यापूर्वक जीवन बिताया। उनके साथ उनकी अत्यन्त रूपवती धर्मपत्नी भी थीं, जिन्हें लोग सीता कहते थे।

पूर्वोचितत्वात् सा लक्ष्मीर्भर्तारमनुगच्छति ।
जनस्थाने वसन् कार्यं त्रिदशानां चकार सः ॥
मारीचं दूषणं हत्वा खरं त्रिशिरसं तथा ।
चतुर्दश सहस्राणि रक्षसां घोरकर्मणाम् ॥
जघान रामो धर्मात्मा प्रजानां हितकाम्यया ।

अवतारके पहले श्रीविष्णुरूपमें रहते समय भगवान्‌के साथ उनकी जो योग्यतमा भार्या लक्ष्मी रहा करती हैं, उन्होंने ही उपयुक्त होनेके कारण श्रीरामावतारके समय सीताके रूपमें अवतीर्ण हो अपने पतिदेवका अनुसरण किया था। भगवान् श्रीराम जनस्थानमें रहकर देवताओंके कार्य सिद्ध करते थे। धर्मात्मा श्रीरामने प्रजाजनोंके हितकी कामनासे भयानक कर्म करनेवाले चौदह हजार राक्षसोंका वध किया। जिनमें मारीच, खर-दूषण और त्रिशिरा आदि प्रधान थे।

विराधं च कबन्धं च राक्षसौ क्रूरकर्मिणौ ॥
जघान च तदा रामो गन्धर्वौ शापविक्षतौ ॥

उन्हीं दिनों दो शापग्रस्त गन्धर्व क्रूरकर्मा राक्षसोंके रूपमें वहाँ रहते थे, जिनके नाम विराध और कबन्ध थे। श्रीरामने उन दोनोंका भी संहार कर डाला।

स रावणस्य भगिनीनासाच्छेदं चकार ह ।
भार्यावियोगं तं प्राप्य मृगयन् व्यचरद् वनम् ॥
ततस्तमृष्यमूकं स गत्वा पम्पामतीत्य च ।
सुग्रीवं मारुतिं दृष्ट्वा चक्रे मैत्रीं तयोः स वै ॥

उन्होंने रावणकी बहिन शूर्पणखाकी नाक भी लक्ष्मणके द्वारा कटवा दी; इसीके कारण (राक्षसोंके षड्यन्त्रसे) उन्हें पत्नीका वियोग देखना पड़ा। तब वे सीताकी खोज करते हुए वनमें विचरने लगे। तदनन्तर ऋष्यमूक पर्वतपर जा पम्पासरोवरको लाँघकर श्रीरामजी सुग्रीव और हनुमान्‌जीसे मिले और उन दोनोंके साथ उन्होंने मैत्री स्थापित कर ली।