महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1918, कुल 2256 में से
संदर्भ में पढ़ेंअन्यत्र जानेका आदेश देकर वे बलदेवजीके साथ वनमें इधर-उधर विचरण करने लगे।
धेनुको दारुणो दैत्यो राजन् रासभविग्रहः ।
तदा तालवने राजन् बलदेवेन वै हतः ।।
राजन्! तालवनमें धेनुक नामक भयंकर दैत्य निवास करता था, जो गधेका रूप धारण करके रहता था। उस समय वह बलदेवजीके हाथसे मारा गया।
ततः कदाचित् कौन्तेय रामकृष्णौ वनं गतौ ।
चारयन्तौ प्रवृद्धानि गोधनानि शुभाननौ ।।
कुन्तीनन्दन! तदनन्तर किसी समय सुन्दर मुखवाले बलराम और श्रीकृष्ण अपने बढ़े हुए गोधनको चरानेके लिये वनमें गये।
विहरन्तौ मुदा युक्तौ वीक्षमाणौ वनानि वै ।
क्ष्वेलयन्तौ प्रगायन्तौ विचिन्वन्तौ च पादपान् ।।
वहाँ वनकी शोभा निहारते हुए वे दोनों भाई घूमते, खेलते, गीत गाते और विभिन्न वृक्षोंकी खोज करते हुए बड़े प्रसन्न होते थे।
नामभिर्व्याहरन्तौ च वत्सान् गाश्च परंतपौ ।
चेरतुर्लोकसिद्धाभिः क्रीडाभिरपराजितौ ।।
शत्रुओंको संताप देनेवाले वे दोनों अजेय वीर वहाँ गौओं और बछड़ोंको नाम ले-लेकर बुलाते और लोकप्रचलित बालोचित क्रीड़ाएँ करते रहते थे।
तौ देवौ मानुषीं दीक्षां वहन्तौ सुरपूजितौ ।