भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 731

आपीनां च सुदोग्ध्रीं च सुवालधिखुरां शुभाम् ॥ १५ ॥ उपपन्नां गुणैः सर्वैः शीलेनानुत्तमेन च । एवंगुणसमायुक्तां वसवे वसुनन्दिनी ॥ १६ ॥ दर्शयामास राजेन्द्र पुरा पौरवनन्दन । द्यौस्तदा तां तु दृष्ट्वैव गां गजेन्द्रेन्द्रविक्रम ॥ १७ ॥ उवाच राजंस्तां देवीं तस्या रूपगुणान् वदन् । एषा गौरुत्तमा देवी वारुणेरसितेक्षणा ॥ १८ ॥ ऋषेस्तस्य वरारोहे यस्येदं वनमुत्तमम् । अस्याः क्षीरं पिबेन्मर्त्यः स्वादु यो वै सुमध्यमे ॥ १९ ॥ दशवर्षसहस्राणि स जीवेत् स्थिरयौवनः । एतच्छ्रुत्वा तु सा देवी नृपोत्तम सुमध्यमा ॥ २० ॥ तमुवाचानवद्याङ्गी भर्तारं दीप्ततेजसम् । अस्ति मे मानुषे लोके नरदेवात्मजा सखी ॥ २१ ॥

वृषभके समान विशाल नेत्रोंवाले महाराज! उस देवीने द्यो नामक वसुको वह शुभ गाय दिखायी, जो भलीभाँति हृष्ट-पुष्ट थी। दूधसे भरे हुए उसके थन बड़े सुन्दर थे, पूँछ और खुर भी बहुत अच्छे थे। वह सुन्दर गाय सभी सद्गुणोंसे सम्पन्न और सर्वोत्तम शील-स्वभावसे युक्त थी। पुरुवंशका आनन्द बढ़ानेवाली सम्राट्! इस प्रकार पूर्वकालमें वसुका आनन्द बढ़ानेवाली देवीने अपने पति वसुको ऐसे सद्गुणोंवाली गौका दर्शन कराया। गजराजके समान पराक्रमी महाराज! द्योने उस गायको देखते ही उसके रूप और गुणोंका वर्णन करते हुए अपनी पत्नीसे कहा—'यह कजरारे नेत्रोंवाली उत्तम गौ दिव्य है। वरारोहे! यह उन वरुणनन्दन महर्षि वसिष्ठकी गाय है, जिनका यह उत्तम तपोवन है। सुमध्यमे! जो मनुष्य इसका स्वादिष्ट दूध पी लेगा, वह दस हजार वर्षोंतक जीवित रहेगा और उतने समयतक उसकी युवावस्था स्थिर रहेगी।' नृपश्रेष्ठ! सुन्दर कटि-प्रदेश और निर्दोष अंगोंवाली वह देवी यह बात सुनकर अपने तेजस्वी पतिसे बोली—'प्राणनाथ! मनुष्यलोकमें एक राजकुमारी मेरी सखी है' ॥ १५—२१ ॥

नाम्ना जितवती नाम रूपयौवनशालिनी । उशीनरस्य राजर्षेः सत्यसंधस्य धीमतः ॥ २२ ॥ दुहिता प्रथिता लोके मानुषे रूपसम्पदा । तस्या हेतोर्महाभाग सवत्सां गां ममेप्सिताम् ॥ २३ ॥

'उसका नाम है जितवती। वह सुन्दर रूप और युवावस्थासे सुशोभित है। सत्यप्रतिज्ञ बुद्धिमान् राजर्षि उशीनरकी पुत्री है। रूपसम्पत्तिकी दृष्टिसे मनुष्यलोकमें उसकी बड़ी ख्याति है। महाभाग! उसीके लिये बछड़ेसहित यह गाय लेनेकी मेरी बड़ी इच्छा है ॥ २२-२३ ॥