महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1316, कुल 2580 में से
संदर्भ में पढ़ेंम्लेच्छभूतं जगत् सर्वं भविष्यति युधिष्ठिर । न श्राद्धैस्तर्पयिष्यन्ति दैवतानीह मानवाः ॥ ४६ ॥ युधिष्ठिर! उस समय सारा जगत् म्लेच्छ हो जायगा। मनुष्य श्राद्ध और यज्ञ-कर्मोंद्वारा पितरों और देवताओंको संतुष्ट नहीं करेंगे ॥ ४६ ॥
न कश्चित् कस्यचिच्छ्रोता न कश्चित् कस्यचिद् गुरुः । तमोग्रस्तस्तदा लोको भविष्यति जनाधिप ॥ ४७ ॥ राजन्! उस समय कोई किसीका उपदेश नहीं सुनेगा और न कोई किसीका गुरु ही होगा। सारा जगत् अज्ञानमय अन्धकारसे आच्छादित हो जायगा ॥ ४७ ॥
परमायुश्च भविता तदा वर्षाणि षोडश । ततः प्राणान् विमोक्ष्यन्ति युगान्ते समुपस्थिते ॥ ४८ ॥ पञ्चमे वाथ षष्ठे वा वर्षे कन्या प्रसूयते । सप्तवर्षाष्टवर्षाश्च प्रजास्यन्ति नरास्तदा ॥ ४९ ॥ उस समय युगान्तकाल उपस्थित होनेपर लोगोंकी आयु अधिक-से-अधिक सोलह वर्षकी होगी, उसके बाद वे प्राणत्याग कर देंगे। पाँचवें या छठे वर्षमें स्त्रियाँ बच्चे पैदा करने लगेंगी और सात-आठ वर्षके पुरुष संतानोत्पादनमें प्रवृत्त हो जायँगे ॥ ४८-४९ ॥
पत्यौ स्त्री तु तदा राजन् पुरुषो वा स्त्रियं प्रति । युगान्ते राजशार्दूल न तोषमुपयास्यति ॥ ५० ॥ नृपश्रेष्ठ! युगान्तकाल आनेपर स्त्री अपने पतिसे और पति अपनी स्त्रीसे संतुष्ट नहीं होंगे ॥ ५० ॥
अल्पद्रव्या वृथालिङ्गा हिंसा च प्रभविष्यति । न कश्चित् कस्यचिद् दाता भविष्यति युगक्षये ॥ ५१ ॥ कलियुगके अन्तभागमें लोगोंके पास धन थोड़ा रहेगा और लोग दिखावेके लिये साधुवेष धारण करेंगे। हिंसाका जोर बढ़ेगा और कोई किसीको कुछ देनेवाला नहीं रहेगा ॥ ५१ ॥
अट्टशूला जनपदाः शिवशूलाश्चतुष्पथाः । केशशूलाः स्त्रियश्चापि भविष्यन्ति युगक्षये ॥ ५२ ॥ युगक्षयकालमें सभी देशोंके लोग अन्न बेचेंगे। ब्राह्मण वेदविक्रय करेंगे और स्त्रियाँ वेश्या वृत्ति अपना लेंगी ॥ ५२ ॥
म्लेच्छाचाराः सर्वभक्षा दारुणाः सर्वकर्मसु । भाविनः पश्चिमे काले मनुष्या नात्र संशयः ॥ ५३ ॥ युगान्तकालके मनुष्य म्लेच्छों-जैसे आचारवाले और सर्वभक्षी यानी अभक्ष्यका भी भक्षण करनेवाले हो जायँगे। वे प्रत्येक कर्ममें अपनी क्रूरताका परिचय देंगे, इसमें संशय नहीं है ॥ ५३ ॥