भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1320

कबन्धान्तर्हितो भानुरुदयास्तमने तदा ।
अकालवर्षी भगवान् भविष्यति सहस्रदृक् ॥ ७९ ॥
उदय और अस्तके समय सूर्य राहुसे ग्रस्त दिखायी देगा। भगवान् इन्द्र समयपर वर्षा नहीं करेंगे ॥

सस्यानि च न रोक्ष्यन्ति युगान्ते पर्युपस्थिते ।
अभीक्ष्णं क्रूरवादिन्यः परुषा रुदितप्रियाः ॥ ८० ॥
युगान्तकाल उपस्थित होनेपर बोयी हुई खेती उगेगी ही नहीं; स्त्रियाँ कठोर स्वभाववाली और सदा कटुवादिनी होंगी। उन्हें रोना ही अधिक पसंद होगा ॥ ८० ॥

भर्तॄणां वचने चैव न स्थास्यन्ति ततः स्त्रियः ।
पुत्राश्च मातापितरौ हनिष्यन्ति युगक्षये ॥ ८१ ॥
वे पतिकी आज्ञामें नहीं रहेंगी। युगान्तकालमें पुत्र माता-पिताकी हत्या करेंगे ॥ ८१ ॥

सूदयिष्यन्ति च पतीन् स्त्रियः पुत्रानपाश्रिताः ।
अपर्वणि महाराज सूर्यं राहुरुपैष्यति ॥ ८२ ॥
नारियाँ अपने बेटोंसे मिलकर पतिकी हत्या करा देंगी। महाराज! अमावस्याके बिना ही राहु सूर्यपर ग्रहण लगायेगा ॥ ८२ ॥

युगान्ते हुतभुक् चापि सर्वतः प्रज्वलिष्यति ।
पानीयं भोजनं चापि याचमानास्तदाध्वगाः ॥ ८३ ॥
न लप्स्यन्ते निवासं च निरस्ताः पथि शेरते ।
युगान्तकाल आनेपर सब ओर आग भी जल उठेगी। उस समय पथिकोंको माँगनेपर कहीं अन्न, जल या ठहरनेके लिये स्थान नहीं मिलेगा। वे सब ओरसे कोरा जवाब पाकर निराश हो सड़कोंपर ही सो रहेंगे ॥

निर्घातवायसा नागाः शकुनाः समृगद्विजाः ॥ ८४ ॥
रूक्षा वाचो विमोक्ष्यन्ति युगान्ते पर्युपस्थिते ।
मित्रसम्बन्धिनश्चापि संत्यक्ष्यन्ति नरास्तदा ॥ ८५ ॥
जनं परिजनं चापि युगान्ते पर्युपस्थिते ।
युगान्तकाल उपस्थित होनेपर बिजलीकी कड़कके समान कड़वी बोली बोलनेवाले कौवे, हाथी, शकुन, पशु और पक्षी आदि बड़ी कठोर वाणी बोलेंगे। उस समयके मनुष्य अपने मित्रों, सम्बन्धियों, सेवकों तथा कुटुम्बीजनोंको भी अकारण त्याग देंगे ॥ ८४-८५½ ॥

अथ देशान् दिशश्चापि पत्तनानि पुराणि च ॥ ८६ ॥
क्रमशः संश्रयिष्यन्ति युगान्ते पर्युपस्थिते ।
हा तात हा सुतेत्येवं तदा वाचः सुदारुणाः ॥ ८७ ॥
विक्रोशमानश्चान्योन्यं जनो गां पर्यटिष्यति ।