महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1321, कुल 2580 में से
संदर्भ में पढ़ेंततस्तुमुलसङ्घाते वर्तमाने युगक्षये ॥ ८८ ॥ प्रायः लोग स्वदेश छोड़कर दूसरे देशों, दिशाओं, नगरों और गाँवोंका आश्रय लेंगे और हा तात! हा पुत्र! इत्यादि रूपसे अत्यन्त दुःखद वाणीमें एक-दूसरेको पुकारते हुए इस पृथ्वीपर विचरेंगे। युगान्तकालमें संसारकी यही दशा होगी। उस समय एक ही साथ समस्त लोकोंका भयंकर संहार होगा ॥ ८६–८८ ॥
द्विजातिपूर्वको लोकः क्रमेण प्रभविष्यति । ततः कालान्तरेऽन्यस्मिन् पुनर्लोकविवृद्धये ॥ ८९ ॥ भविष्यति पुनर्दैवमनुकूलं यदृच्छया । यदा सूर्यश्च चन्द्रश्च तथा तिष्यबृहस्पती ॥ ९० ॥ एकराशौ समेष्यन्ति प्रपत्स्यति तदा कृतम् । कालवर्षी च पर्जन्यो नक्षत्राणि शुभानि च ॥ ९१ ॥ तदनन्तर कालान्तरमें सत्ययुगका आरम्भ होगा और फिर क्रमशः ब्राह्मण आदि वर्ण प्रकट होकर अपने प्रभावका विस्तार करेंगे। उस समय लोकके अभ्युदयके लिये पुनः अनायास दैव अनुकूल होगा। जब सूर्य, चन्द्रमा और बृहस्पति एक साथ पुष्य नक्षत्र एवं तदनुरूप एक राशि कर्कमें पदार्पण करेंगे, तब सत्ययुगका प्रारम्भ होगा। उस समय मेघ समयपर वर्षा करेगा। नक्षत्र शुभ एवं तेजस्वी हो जायँगे ॥ ८९—९१ ॥
प्रदक्षिणा ग्रहाश्चापि भविष्यन्त्यनुलोमगाः । क्षेमं सुभिक्षमारोग्यं भविष्यति निरामयम् ॥ ९२ ॥ ग्रह प्रदक्षिणाभावसे अनुकूल गतिका आश्रय ले अपने पथपर अग्रसर होंगे। उस समय सबका मंगल होगा। देशमें सुकाल आ जायगा। आरोग्यका विस्तार होगा। तथा रोग-व्याधिका नाम भी नहीं रहेगा ॥ ९२ ॥
कल्की विष्णुयशा नाम द्विजः कालप्रचोदितः । उत्पत्स्यते महावीर्यो महाबुद्धिपराक्रमः ॥ ९३ ॥ सम्भूतः सम्भलग्रामे ब्राह्मणावसथे शुभे । (महात्मा वृत्तसम्पन्नः प्रजानां हितकृन्नृप ।) राजन्! युगान्तके समय कालकी प्रेरणासे सम्भल नामक ग्राममें किसी ब्राह्मणके मंगलमय गृहमें एक महान् शक्तिशाली बालक प्रकट होगा, जिसका नाम होगा विष्णुयशा कल्की। वह महान् बुद्धि एवं पराक्रमसे सम्पन्न महात्मा, सदाचारी तथा प्रजावर्गका हितैषी होगा। (वह बालक ही भगवान्का कल्की अवतार कहलायेगा) ॥ ९३ ॥
मनसा तस्य सर्वाणि वाहनान्यायुधानि च ॥ ९४ ॥ उपस्थास्यन्ति योधाश्च शस्त्राणि कवचानि च । स धर्मविजयी राजा चक्रवर्ती भविष्यति ॥ ९५ ॥