भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

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पृष्ठ 1536

एष चेज्जनयेद् गर्भं सोऽस्या देव्याः पतिर्भवेत् । एवं संचिन्त्य भगवान् ब्रह्मलोकं तदा गतः ॥ २१ ॥ गृहीत्वा देवसेनां तामवदत् स पितामहम् । उवाच चास्या देव्यास्त्वं साधुशूरं पतिं दिश ॥ २२ ॥ ‘अतः ये यदि किसी बालकको उत्पन्न करें तो वही इस देवीका पति होगा।’ ऐसा सोच-विचारकर ऐश्वर्यशाली इन्द्र उस समय उस देवसेनाको साथ ले ब्रह्मलोकमें गये और ब्रह्माजीसे इस प्रकार बोले—‘भगवन्! आप इस देवीके लिये कोई अच्छे स्वभावका शूरवीर पति प्रदान कीजिये’ ॥ २१-२२ ॥

ब्रह्मोवाच

मयैतच्चिन्तितं कार्यं त्वया दानवसूदन । तथा स भविता गर्भो बलवानुरुविक्रमः ॥ २३ ॥ ब्रह्माजीने कहा—दानवसूदन! इस विषयमें तुमने जो विचार किया है वही मैंने भी सोचा है। वैसा होनेपर ही एक महान् पराक्रमी बलवान् वीरका प्रादुर्भाव होगा ॥ २३ ॥ स भविष्यति सेनानीस्त्वया सह शतक्रतो । अस्या देव्याःपतिश्चैव स भविष्यति वीर्यवान् ॥ २४ ॥ शतक्रतो! वही तुम्हारे साथ रहकर देवसेनाका पराक्रमी सेनापति होगा और वही इस देवीका भी पति होगा ॥ २४ ॥