भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

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पृष्ठ 1703

स्मयन्निवाञ्जलिं कृत्वा पार्थिवं हेतुमद् वचः ॥ ३८ ॥ वह रात बीतनेपर सूर्यपुत्र कर्णने आकर राजा दुर्योधनसे हाथ जोड़ मुसकराते हुए यह युक्तियुक्त वचन कहा— ॥ ३८ ॥

न मृतो जयते शत्रूञ्जीवन् भद्राणि पश्यति । मृतस्य भद्राणि कुतः कौरवेय कुतो जयः ॥ ३९ ॥ ‘कुरुनन्दन! मरा हुआ मनुष्य कभी शत्रुओंपर विजय नहीं पाता। जो जीवित रहता है वह कभी सुखके दिन भी देखता है। मरे हुए को कहाँ सुख और कहाँ विजय? ॥ ३९ ॥

न कालोऽद्य विषादस्य भयस्य मरणस्य वा । परिष्वज्याब्रवीच्चैनं भुजाभ्यां स महाभुजः ॥ ४० ॥ ‘यह समय शोक मनाने, भयभीत होने अथवा मरनेका नहीं है’, यह कहकर महाबाहु कर्णने दोनों भुजाओंसे खींचकर दुर्योधनको हृदयसे लगा लिया और कहा— ॥ ४० ॥

उत्तिष्ठ राजन् किं शेषे कस्माच्छोचसि शत्रुहन् । शत्रून् प्रताप्य वीर्येण स कथं मृत्युमिच्छसि ॥ ४१ ॥ ‘शत्रुघाती नरेश! उठो, क्यों सो रहे हो? किसलिये शोक करते हो? अपने पराक्रमसे शत्रुओंको संतप्त करके अब मृत्युकी इच्छा क्यों करते हो? ॥ ४१ ॥

अथवा ते भयं जातं दृष्ट्वार्जुनपराक्रमम् । सत्यं ते प्रतिजानामि वधिष्यामि रणेऽर्जुनम् ॥ ४२ ॥ ‘अथवा यदि तुम्हें अर्जुनका पराक्रम देखकर भय हो गया हो तो मैं तुमसे सच्ची प्रतिज्ञा करके कहता हूँ कि मैं युद्धमें अर्जुनको अवश्य मार डालूँगा ॥ ४२ ॥

गते त्रयोदशे वर्षे सत्येनायुधमालभे । आनयिष्याम्यहं पार्थान् वशं तव जनाधिप ॥ ४३ ॥ ‘महाराज! मैं धनुष छूकर सचाईके साथ यह शपथ ग्रहण करता हूँ कि तेरहवाँ वर्ष व्यतीत होते ही पाण्डवोंको तुम्हारे वशमें ला दूँगा’ ॥ ४३ ॥

एवमुक्तस्तु कर्णेन दैत्यानां वचनात् तथा । प्रणिपातेन चाप्येषामुदतिष्ठत् सुयोधनः ॥ ४४ ॥ कर्णके ऐसा कहनेपर और इन दुःशासन आदि भाइयोंके प्रणामपूर्वक अनुनय-विनय करनेपर दैत्योंके वचनोंका स्मरण करके दुर्योधन अपने आसनसे उठ खड़ा हुआ ॥ ४४ ॥

दैत्यानां तद् वचः श्रुत्वा हृदि कृत्वा स्थिरां मतिम् । ततो मनुजशार्दूलो योजयामास वाहिनीम् ॥ ४५ ॥ रथनागाश्वकलिलां पदातिजनसंकुलाम् । गङ्गौघप्रतिमा राजन् सा प्रयाता महाचमूः ॥ ४६ ॥ दैत्योंके पूर्वोक्त कथनको याद करके नरश्रेष्ठ दुर्योधनने पाण्डवोंसे युद्ध करनेका पक्का विचार कर लिया और फिर हस्तिनापुर जानेके लिये रथ, हाथी, घोड़े और पैदल सैनिकोंसे