महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2088, कुल 2580 में से
संदर्भ में पढ़ेंअविक्षतशरीराश्चाप्यप्रमृष्टशरासनाः । असंज्ञा भुवि संगम्य किं शेध्वमपराजिताः ॥ १५ ॥ ‘तुम्हारे शरीरोंमें कोई घाव नहीं है, तुमने धनुष-बाणका स्पर्शतक नहीं किया है तथा तुम किसीसे परास्त होनेवाले नहीं हो; ऐसी दशामें इस पृथ्वीपर संज्ञाशून्य होकर क्यों पड़े हो?’ ॥ १५ ॥
सानूनीवाद्रैः संसुप्तान् दृष्ट्वा भ्रातॄन् महामतिः । सुखं प्रसुप्तान् प्रस्विन्नः खिन्नः कष्टां दशां गतः ॥ १६ ॥ परम बुद्धिमान् युधिष्ठिर धरतीपर पड़े हुए पर्वत-शिखरोंके समान अपने भाइयोंको इस प्रकार सुखकी नींद सोते देखकर बहुत दुःखी हुए। उनके सारे अंगोंमें पसीना निकल आया और वे अत्यन्त कष्टप्रद अवस्थामें पहुँच गये ॥ १६ ॥
एवमेवेदमित्युक्त्वा धर्मात्मा स नरेश्वरः । शोकसागरमध्यस्थो दध्यौ कारणमाकुलः ॥ १७ ॥ ‘यह ऐसी ही होनहार है’, ऐसा कहकर धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर शोकसागरमें मग्न तथा व्याकुल होकर भाइयोंकी मृत्युके कारणपर विचार करने लगे ॥ १७ ॥
इतिकर्तव्यतां चेति देशकालविभागवित् । नाभिपेदे महाबाहुश्चिन्तयानो महामतिः ॥ १८ ॥ वे यह भी सोचने लगे कि ‘अब क्या करना चाहिये?’ महाबुद्धिमान् महाबाहु युधिष्ठिर देश और कालके तत्त्वको पृथक्-पृथक् जाननेवाले थे; तो भी बहुत सोचने-विचारनेपर भी वे किसी निश्चयपर नहीं पहुँच सके ॥ १८ ॥
अथ संस्तभ्य धर्मात्मा तदाऽऽत्मानं तपोयुतः । एवं विलप्य बहुधा धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः ॥ १९ ॥ बुद्ध्या विचिन्तयामास वीराः केन निपातिताः ॥ २० ॥ नैषां शस्त्रप्रहारोऽस्ति पदं नेहास्ति कस्यचित् । भूतं महदिदं मन्ये भ्रातरो येन मे हताः ॥ २१ ॥ तत्पश्चात् धर्मात्मा और तपस्वी धर्मपुत्र युधिष्ठिर अपने मनको स्थिर करके बहुत विलाप करनेके पश्चात् अपनी बुद्धिद्वारा यह विचार करने लगे—‘इन वीरोंको किसने मार गिराया है? इनके शरीरोंमें अस्त्र-शस्त्रोंके आघातका कोई चिह्न नहीं है और न इस स्थानपर किसी दूसरेके पैरोंका निशान ही है। मैं समझता हूँ, अवश्य वह कोई भारी भूत है, जिसने मेरे भाइयोंको मारा है ॥ १९—२१ ॥
एकाग्रं चिन्तयिष्यामि पीत्वा वेत्स्यामि वा जलम् । स्यात् तु दुर्योधनेनेदमुपांशुविहितं कृतम् ॥ २२ ॥ ‘इस विषयमें मैं चित्तको एकाग्र करके फिर सोचूँगा अथवा पानी पीकर इस रहस्यको समझनेकी चेष्टा करूँगा। सम्भव है, दुर्योधनने चुपके-चुपके कोई षड्यन्त्र किया