महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| विराटपर्व |
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(पाण्डवप्रवेशपर्व)
१- विराटनगरमें अज्ञातवास करनेके लिये पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा युधिष्ठिरके द्वारा अपने भावी कार्यक्रमका दिग्दर्शन २- भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश ३- नकुल, सहदेव तथा द्रौपदीद्वारा अपने-अपने भावी कर्तव्योंका दिग्दर्शन ४- धौम्यका पाण्डवोंको राजाके यहाँ रहनेका ढंग बताना और सबका अपने-अपने अभीष्ट स्थानोंको जाना ५- पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना ६- युधिष्ठिरद्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति और देवीका प्रत्यक्ष प्रकट होकर उन्हें वर देना ७- युधिष्ठिरका राजसभामें जाकर विराटसे मिलना और वहाँ आदरपूर्वक निवास पाना ८- भीमसेनका राजा विराटकी सभामें प्रवेश और राजाके द्वारा आश्वासन पान ९- द्रौपदीका सैरन्ध्रीके वेशमें विराटके रनिवासमें जाकर रानी सुदेष्णासे वार्तालाप करना और वहाँ निवास पाना १०- सहदेवका राजा विराटके साथ वार्तालाप और गौओंकी देखभालके लिये उनकी नियुक्ति ११- अर्जुनका राजा विराटसे मिलना और राजाके द्वारा कन्याओंको नृत्य आदिकी शिक्षा देनेके लिये उनको नियुक्त करना १२- नकुलका विराटके अश्वोंकी देख-रेखमें नियुक्त होना
(समयपालनपर्व)
१३- भीमसेनके द्वारा जीमूत नामक विश्वविख्यात मल्लका वध
(कीचकवधपर्व)
१४- कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणय-याचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना १५- रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना १६- कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान १७- द्रौपदीका भीमसेनके समीप जाना १८- द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दुःखके उद्गार प्रकट करना