भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 994

विलोकयामास तदा पुष्पहेतोररिंदमः ॥ २१ ॥

शत्रुदमन भीमसेनने उस समय (पूर्वोक्त पुष्पकी प्राप्तिके लिये एक बार) यक्ष, गन्धर्व,

देवता और ब्रह्मर्षियोंसे सेवित उस विशाल पर्वतपर (सब ओर) दृष्टिपात किया ।। २१ ।।

विषमच्छदैरचितैरनुलिप्त इवाङ्गुलैः ।

वलिभिर्धातुविच्छेदैः काञ्चनाञ्जनराजतैः ।

सपक्षमिव नृत्यन्तं पार्श्वलग्नेः पयोधरैः ॥ २२ ॥

उस समय अनेक धातुओंसे रँगे हुए सप्तपर्ण (छितवन) के पत्तोंद्वारा उनके ललाटमें

विभिन्न धातुओंके काले, पीले और सफेद रंग लग गये थे, जिससे ऐसा जान पड़ता था

मानो अँगुलियोंद्वारा त्रिपुण्ड्र चन्दन लगाया गया हो। उस पर्वत-शिखरके उभय पार्श्वमें लगे

हुए मेघोंसे उसकी ऐसी शोभा हो रही थी मानो वह पुनः पंखधारी होकर नृत्य कर रहा

है ।। २२ ।।

मुक्ताहारैरिव चितं च्युतैः प्रस्रवणोदकैः ।

अभिरामदरीकुञ्जनिर्झरोदककन्दरम् ॥ २३ ॥

निरन्तर झरनेवाले झरनोंके जल उस पहाड़के कण्ठदेशमें अवलम्बित मोतियोंके हार-

से प्रतीत हो रहे थे। उस पर्वतकी गुफा, कुंज, निर्झर, सलिल और कन्दराएँ सभी मनोहर

थे ।। २३ ।।

अप्सरोनूपुररवैः प्रनृत्तवरबर्हिणम् ।

दिग्वारणविषाणाग्रैर्घृष्टोपलशिलातलम् ॥ २४ ॥

वहाँ अप्सराओंके नूपुरोंकी मधुर ध्वनिके साथ सुन्दर मोर नाच रहे थे। उस पर्वतके

एक-एक रत्न और शिलाखण्डपर दिग्गजोंके दाँतोंकी रगड़‌का चिह्न अंकित था ।। २४ ।।

स्रस्तांशुकमिवाक्षोभ्यैर्निम्नगा निःसृतैर्जलैः ।

सशष्पकवलैः स्वस्थैरदूरपरिवर्तिभिः ॥ २५ ॥

भयानभिज्ञैर्हरिणैः कौतूहलनिरीक्षितः ।

चालयन्नुरुवेगेन लताजालान्यनेकशः ॥ २६ ॥

आक्रीडमानो हृष्टात्मा श्रीमान् वायुसुतो ययौ ।

प्रियामनोरथं कर्तुमुद्यतश्चारुलोचनः ॥ २७ ॥

निम्नगामिनी नदियोंसे निकला हुआ क्षोभरहित जल नीचेकी ओर इस प्रकार बह रहा

था, मानो उस पर्वतका वस्त्र खिसककर गिरा जाता हो। भयसे अपरिचित और स्वस्थ

हरिण मुँहमें हरे घासका कौर लिये पास ही खड़े होकर भीमसेनकी ओर कौतूहलभरी

दृष्टिसे देख रहे थे। उस समय मनोहर नेत्रोंवाले शोभाशाली वायुपुत्र भीम अपने महान् वेगसे

अनेक लतासमूहोंको विचलित करते हुए हर्षपूर्ण हृदयसे खेल-सा करते जा रहे थे। वे

अपनी प्रिया द्रौपदीका प्रिय मनोरथ पूर्ण करनेको सर्वथा उद्यत थे ।। २५-२७ ।।

प्रांशुः कनकवर्णाभः सिंहसंहननो युवा ।