भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 1085, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 1085

द्यूतक्रीड़ाके समय द्रौपदीको जो महान् क्लेश दिया गया और पाण्डवोंके प्रति कठोर बातें सुनायी गयीं, उन सबको याद करके वे संग्रामभूमिमें रुद्रके समान विचरेंगे ॥ १५ १/२ ॥
लोहिताक्षो गुडाकेशो नारायणसहायवान् ॥ १६ ॥
उभयोः सेनयोर्वीरो रथो नास्तीति तादृशः ।
लाल नेत्रोंवाले निद्राविजयी अर्जुनके सखा और सहायक नारायणस्वरूप भगवान् श्रीकृष्ण हैं। कौरव-पाण्डव दोनों सेनाओंमें अर्जुनके समान वीर रथी दूसरा कोई नहीं है ॥ १६ १/२ ॥
न हि देवेषु सर्वेषु नासुरेषूरगेषु च ॥ १७ ॥
राक्षसेष्वथ यक्षेषु नरेषु कुत एव तु ।
भूतोऽथवा भविष्यो वा रथः कश्चिन्मया श्रुतः ॥ १८ ॥
समस्त देवताओं, असुरों, नागों, राक्षसों तथा यक्षोंमें भी अर्जुनके समान कोई नहीं है; फिर मनुष्योंमें तो हो ही कैसे सकता है? भूत या भविष्यमें भी कोई ऐसा रथी मेरे सुननेमें नहीं आया है ॥ १७-१८ ॥
समायुक्तो महाराज रथः पार्थस्य धीमतः ।
वासुदेवश्च संयन्ता योद्धा चैव धनंजयः ॥ १९ ॥
महाराज! बुद्धिमान् अर्जुनका रथ जुता हुआ है। भगवान् श्रीकृष्ण उसके सारथि और युद्धकुशल धनंजय रथी हैं ॥ १९ ॥
गाण्डीवं च धनुर्दिव्यं ते चाश्वा वातरंहसः ।
अभेद्यं कवचं दिव्यमक्षय्यौ च महेषुधी ॥ २० ॥
दिव्य गाण्डीव धनुष है, वायुके समान वेगशाली अश्व हैं, अभेद्य दिव्य कवच है तथा अक्षय बाणोंसे भरे हुए दो महान् तरकस हैं ॥ २० ॥
अस्त्रग्रामश्च माहेन्द्रो रौद्रः कौबेर एव च ।
याम्यश्च वारुणश्चैव गदाश्चोग्रप्रदर्शनाः ॥ २१ ॥
उस रथमें अस्त्रोंके समुदाय—महेन्द्र, रुद्र, कुबेर, यम एवं वरुणसम्बन्धी अस्त्र हैं, भयंकर दिखायी देनेवाली गदाएँ हैं ॥ २१ ॥
वज्रादीनि च मुख्यानि नानाप्रहरणानि च ।
दानवानां सहस्राणि हिरण्यपुरवासिनाम् ॥ २२ ॥
हतान्येकरथेनाजौ कस्तस्य सदृशो रथः ।
वज्र आदि भाँति-भाँतिके श्रेष्ठ आयुध भी उस रथमें विद्यमान हैं। अर्जुनने युद्धमें एकमात्र उस रथकी सहायतासे हिरण्यपुरमें निवास करनेवाले सहस्रों दानवोंका संहार किया है। उसके समान दूसरा कौन रथ हो सकता है? ॥
एष हन्याद्धि संरम्भी बलवान् सत्यविक्रमः ॥ २३ ॥
तव सेनां महाबाहुः स्वां चैव परिपालयन् ।

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