महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1510, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां कालः<sup>३०</sup> कलयतामहम् ।
मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम् ॥ ३० ॥
मैं दैत्योंमें प्रह्लाद<sup>३१</sup> और गणना करनेवालोंका समय हूँ तथा पशुओंमें मृगराज<sup>३२</sup> सिंह और पक्षियोंमें मैं गरुड़<sup>३३</sup> हूँ ॥ ३० ॥
पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम् ।
झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ॥ ३१ ॥
मैं पवित्र करनेवालोंमें वायु और शस्त्रधारियोंमें श्रीराम<sup>१</sup> हूँ तथा मछलियोंमें मगर<sup>२</sup> हूँ और नदियोंमें श्रीभागीरथी गंगाजी हूँ<sup>३</sup> ॥ ३१ ॥
सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन ।
अध्यात्मविद्या विद्यानां वादः प्रवदतामहम् ॥ ३२ ॥
हे अर्जुन! सृष्टियोंका आदि और अन्त तथा मध्य भी मैं ही हूँ। मैं विद्याओंमें अध्यात्मविद्या<sup>४</sup> अर्थात् ब्रह्मविद्या और परस्पर विवाद करने-वालोंका तत्त्व-निर्णयके लिये किया जानेवाला वाद<sup>५</sup> हूँ ॥ ३२ ॥
अक्षराणामकारोऽस्मि द्वन्द्वः सामासिकस्य च ।
अहमेवाक्षयः कालो धाताहं विश्वतोमुखः ॥ ३३ ॥
मैं अक्षरोंमें अकार<sup>६</sup> हूँ और समासोंमें द्वन्द्व<sup>७</sup> नामक समास हूँ। अक्षय काल<sup>८</sup> अर्थात् कालका भी महाकाल तथा सब ओर मुखवाला विराट्स्वरूप, सबका धारण-पोषण करनेवाला भी मैं ही हूँ ॥ ३३ ॥
मृत्युः सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् ।
कीर्तिः श्रीर्वाक् च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा ॥ ३४ ॥
मैं सबका नाश करनेवाला मृत्यु और उत्पन्न होनेवालोंका उत्पत्तिहेतु<sup>१</sup> हूँ तथा स्त्रियोंमें कीर्ति, श्री, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा<sup>२</sup> हूँ ॥ ३४ ॥
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् ।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥ ३५ ॥
तथा गायन करनेयोग्य श्रुतियोंमें मैं बृहत्साम<sup>३</sup> और छन्दोंमें गायत्री<sup>४</sup> छन्द हूँ तथा महीनोंमें मार्गशीर्ष<sup>५</sup> और ऋतुओंमें वसन्त<sup>६</sup> मैं हूँ ॥ ३५ ॥
द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् ।
जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम् ॥ ३६ ॥
मैं छल करनेवालोंमें जूआ<sup>१</sup> और प्रभावशाली पुरुषोंका प्रभाव हूँ। मैं जीतनेवालोंका विजय हूँ। निश्चय करनेवालोंका निश्चय और सात्त्विक पुरुषोंका