महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1835, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंभारत! तथापि भीष्मने श्रीकृष्ण और अर्जुनके सम्पूर्ण अंगोंमें अपने पैने बाणोंसे गहरे
आघात किये ।। ६१ ।।
शुशुभाते नरव्याघ्रौ तौ भीष्मशरविक्षतौ ।
गोवृषाविव संरब्धौ विषाणैर्लिखिताङ्कितौ ।। ६२ ।।
भीष्मके बाणोंसे क्षत-विक्षत हो वे नरश्रेष्ठ श्रीकृष्ण और अर्जुन क्रोधमें भरे हुए उन दो
साँड़ोंके समान सुशोभित हुए, जिनके सम्पूर्ण शरीरमें सींगोंके आघातसे बहुत-से घाव हो
गये हों ।। ६२ ।।
पुनश्चापि सुसंरब्धः शरैः शतसहस्रशः ।
कृष्णयोर्युधि संरब्धो भीष्मोऽथावारयद् दिशः ।। ६३ ।।
तत्पश्चात् रोषावेशमें भरे हुए भीष्मने सैकड़ों-हजारों बाणोंकी वर्षा करके युद्धभूमिमें
श्रीकृष्ण और अर्जुनकी सम्पूर्ण दिशाओंको आच्छादित एवं अवरुद्ध कर दिया ।। ६३ ।।
वार्ष्णेयं च शरैस्तीक्ष्णैः कम्पयामास रोषितः ।
मुहुर्ह्यर्दयन् भीष्मः प्रहस्य स्वनवत् तदा ।। ६४ ।।
इतना ही नहीं, रोषमें भरे हुए भीष्मने जोर-जोरसे हँसकर अपने तीखे बाणोंसे बारंबार
पीड़ित करते हुए वृष्णिकुलभूषण श्रीकृष्णको कम्पित-सा कर दिया ।। ६४ ।।
ततस्तु कृष्णः समरे दृष्ट्वा भीष्मपराक्रमम् ।
सम्प्रेक्ष्य च महाबाहुः पार्थस्य मृदुयुद्धताम् ।। ६५ ।।
भीष्मं च शरवर्षाणि सृजन्तमनिशं युधि ।
प्रतपन्तमिवादित्यं मध्यमासाद्य सेनयोः ।। ६६ ।।
वरान् वरान् विनिघ्नन्तं पाण्डुपुत्रस्य सैनिकान् ।
युगान्तमिव कुर्वाणं भीष्मं यौधिष्ठिरे बले ।। ६७ ।।
तदनन्तर महाबाहु श्रीकृष्णने उस समरांगणमें भीष्मका पराक्रम देखकर यह विचार
किया कि अर्जुन तो कोमलतापूर्वक युद्ध कर रहा है और भीष्म युद्धस्थलमें निरन्तर
बाणोंकी वर्षा कर रहे हैं। ये दोनों सेनाओंके बीचमें आकर तपते हुए सूर्यकी भाँति
सुशोभित होते और पाण्डुपुत्र युधिष्ठिरके अच्छे-अच्छे सैनिकोंको चुन-चुनकर मार रहे हैं।
युधिष्ठिरकी सेनामें भीष्मने प्रलयकालका-सा दृश्य उपस्थित कर दिया है ।। ६५-६७ ।।
अमृष्यमाणो भगवान् केशवः परवीरहा ।
अचिन्तयदमेयात्मा नास्ति यौधिष्ठिरं बलम् ।। ६८ ।।
एकाह्ना हि रणे भीष्मो नाशयेद् देवदानवान् ।
किं नु पाण्डुसुतान् युद्धे सबलान् सपदानुगान् ।। ६९ ।।
यह सब देख और सोचकर शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले अप्रमेयस्वरूप भगवान्
श्रीकृष्ण सहन न कर सके। उन्होंने मन-ही-मन विचार किया कि युधिष्ठिरकी सेनाका
अस्तित्व मिटना चाहता है। भीष्म रणभूमिमें एक ही दिनमें सम्पूर्ण देवताओं और दानवोंका