भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 2295

द्रौपदेयाः शिखण्डी च कुन्तिभोजश्च वीर्यवान् । सुशर्मा च विराटश्च पाण्डवेया महाबलाः ॥ ४१ ॥ एते चान्ये च बहवः पीडिता भीष्मसायकैः । समुद्धृताः फाल्गुनेन निमग्नाः शोकसागरे ॥ ४२ ॥ इसी समय पांचालराज द्रुपद, पराक्रमी धृष्टकेतु, पाण्डुनन्दन भीमसेन, द्रुपदकुमार धृष्टद्युम्न, नकुल-सहदेव, चेकितान, पाँच केकयराजकुमार, महाबाहु सात्यकि, सुभद्राकुमार अभिमन्यु, घटोत्कच, द्रौपदीके पाँचों पुत्र, शिखण्डी, पराक्रमी कुन्तिभोज, सुशर्मा तथा विराट—ये और दूसरे भी बहुत-से महाबली पाण्डव-सैनिक भीष्मके बाणोंसे पीड़ित हो शोकके समुद्रमें डूब रहे थे; परंतु अर्जुनने उन सबका उद्धार कर दिया ॥ ३९—४२ ॥

ततः शिखण्डी वेगेन प्रगृह्य परमायुधम् । भीष्ममेवाभिदुद्राव रक्ष्यमाणः किरीटिना ॥ ४३ ॥ तब शिखण्डी अपने उत्तम अस्त्र-शस्त्रोंको लेकर बड़े वेगसे भीष्मकी ही ओर दौड़ा। उस समय किरीटधारी अर्जुन उसकी रक्षा कर रहे थे ॥ ४३ ॥

ततोऽस्यानुचरान् हत्वा सर्वान् रणविभागवित् । भीष्ममेवाभिदुद्राव बीभत्सुरपराजितः ॥ ४४ ॥ तत्पश्चात् युद्धविभागके अच्छे ज्ञाता और किसीसे भी परास्त न होनेवाले अर्जुनने भीष्मके पीछे चलनेवाले समस्त योद्धाओंको मारकर स्वयं भी भीष्मपर ही धावा किया ॥ ४४ ॥

सात्यकिश्चेकितानश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः । विराटो द्रुपदश्चैव माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ ॥ ४५ ॥ दुद्रुवुर्भीष्ममेवाजौ रक्षिता दृढधन्वना । इनके साथ सात्यकि, चेकितान, द्रुपदकुमार धृष्टद्युम्न, विराट, द्रुपद, माद्रीकुमार पाण्डुपुत्र नकुल-सहदेवने भी युद्धमें भीष्मपर ही आक्रमण किया। ये सब-के-सब सुदृढ़ धनुष धारण करनेवाले अर्जुनसे सुरक्षित थे ॥

अभिमन्युश्च समरे द्रौपद्याः पञ्च चात्मजाः ॥ ४६ ॥ दुद्रुवुः समरे भीष्मं समुद्यतमहायुधाः । द्रौपदीके पाँचों पुत्र और अभिमन्यु भी महान् अस्त्र-शस्त्र लिये उस समरांगणमें भीष्मकी ही ओर दौड़े ॥

ते सर्वे दृढधन्वानः संयुगेष्वपलायिनः ॥ ४७ ॥ बहुधा भीष्ममानर्च्छन्मार्गणेः क्षतमार्गणैः । ये सभी वीर सुदृढ़ धनुष धारण करनेवाले और युद्धसे कभी पीछे न हटनेवाले थे। इन्होंने शत्रुओंके बाणोंको नष्ट करनेवाले सायकोंद्वारा भीष्मको बारंबार पीड़ित किया ॥ ४७ १/२ ॥