महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें‘दुर्योधन! मैं अपने कुलके हितके लिये तुमसे जो कुछ कहता हूँ, उसे ध्यान देकर सुनो। नृपश्रेष्ठ! उसे सुनकर अपने कुलका हितसाधन करो ।। १६ ।। मम तात पिता राजन् शान्तनुर्लोकविश्रुतः । तस्याहमेक एवासं पुत्रः पुत्रवतां वरः ।। १७ ।। ‘तात! मेरे पिता शान्तनु विश्वविख्यात नरेश थे, जो पुत्रवानोंमें श्रेष्ठ समझे जाते थे। राजन्! मैं उनका इकलौता पुत्र था ।। १७ ।। तस्य बुद्धिः समुत्पन्ना द्वितीयः स्यात् कथं सुतः । एकपुत्रमपुत्रं वै प्रवदन्ति मनीषिणः ।। १८ ।। ‘अतः उनके मनमें यह विचार उत्पन्न हुआ कि ‘मेरे दूसरा पुत्र कैसे हो? क्योंकि मनीषी पुरुष एक पुत्रवालेको पुत्रहीन ही बताते हैं ।। १८ ।। न चोच्छेदं कुलं यायाद् विस्तीर्येच्च कथं यशः । तस्याहमीप्सितं बुद्ध्वा कालीं मातरमावहम् ।। १९ ।। प्रतिज्ञां दुष्करां कृत्वा पितुरर्थे कुलस्य च । अराजा चोर्ध्वरेताश्च यथा सुविदितं तव । प्रतीतो निवसाम्येष प्रतिज्ञामनुपालयन् ।। २० ।। ‘किसी प्रकार इस कुलका उच्छेद न हो और इसके यशका सदा विस्तार होता रहे’—उनकी आन्तरिक इच्छा जानकर मैं कुलकी भलाई और पिताकी प्रसन्नताके लिये राजा न होने और जीवनभर ऊर्ध्वरेता (नैष्ठिक ब्रह्मचारी) रहनेकी दुष्कर प्रतिज्ञा करके माता काली (सत्यवती)-को ले आया। ये सारी बातें तुमको अच्छी तरह ज्ञात हैं। मैं उसी प्रतिज्ञाका पालन करता हुआ सदा प्रसन्नतापूर्वक यहाँ निवास करता हूँ ।। १९-२० ।। तस्यां जज्ञे महाबाहुः श्रीमान् कुरुकुलोद्वहः । विचित्रवीर्यो धर्मात्मा कनीयान् मम पार्थिव ।। २१ ।। ‘राजन्! सत्यवतीके गर्भसे कुरुकुलका भार वहन करनेवाले धर्मात्मा महाबाहु श्रीमान् विचित्रवीर्य उत्पन्न हुए, जो मेरे छोटे भाई थे ।। २१ ।। स्वर्यातेऽहं पितरि तं स्वराज्ये संन्यवेशयम् । विचित्रवीर्यं राजानं भृत्यो भूत्वा ह्यधश्चरः ।। २२ ।। ‘पिताके स्वर्गवासी हो जानेपर मैंने अपने राज्यपर राजा विचित्रवीर्यको ही बिठाया और स्वयं उनका सेवक होकर राज्यसिंहासनसे नीचे खड़ा रहा ।। २२ ।। तस्याहं सदृशान् दारान् राजेन्द्र समुपाहरम् । जित्वा पार्थिवसङ्घातमपि ते बहुशः श्रुतम् ।। २३ ।। ‘राजेन्द्र! उनके लिये राजाओंके समूहको जीतकर मैंने योग्य पत्नियाँ ला दीं। यह वृत्तान्त भी तुमने बहुत बार सुना होगा ।। २३ ।। ततो रामेण समरे द्वन्द्वयुद्धमुपागमम् ।