महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 144, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंनाकुलिस्तु शतानीको वृषसेनं समभ्ययात् । विव्याध चैनं दशभिर्नाराचैर्मर्मभेदिभिः ॥ ७ ॥ इसी समय नकुलके पुत्र शतानीकने वृषसेनपर आक्रमण किया और दस मर्मभेदी नाराचोंद्वारा उसे बींध डाला ॥ ७ ॥
तस्य कर्णात्मजश्चापं छित्त्वा केतुमपातयत् । तं भ्रातरं परीप्सन्तो द्रौपदेयाः समभ्ययुः ॥ ८ ॥ तब कर्णके पुत्रने शतानीकके धनुषको काटकर उनके ध्वजको भी गिरा दिया। यह देख अपने भाईकी रक्षा करनेके लिये द्रौपदीके दूसरे पुत्र भी वहाँ आ पहुँचे ॥ ८ ॥
कर्णात्मजं शरव्रातैरदृश्यं चक्रुरोजसा । तान् नदन्तोऽभ्यधावन्त द्रोणपुत्रमुखा रथाः ॥ ९ ॥ छादयन्तो महाराज द्रौपदेयान् महारथान् । शरैर्नानाविधैस्तूर्णं पर्वताञ्जलदा इव ॥ १० ॥ उन्होंने अपने बाणसमूहोंकी वर्षासे कर्णकुमार वृषसेनको अनायास ही आच्छादित करके अदृश्य कर दिया। महाराज! यह देख अश्वत्थामा आदि महारथी सिंहनाद करते हुए उनपर टूट पड़े और जैसे मेघ पर्वतोंपर जलकी धारा गिराते हैं, उसी प्रकार वे नाना प्रकारके बाणोंकी वर्षा करते हुए तुरंत ही महारथी द्रौपदीपुत्रोंको आच्छादित करने लगे ॥ ९-१० ॥
तान् पाण्डवाः प्रत्यगृह्णंस्त्वरिताः पुत्रगृद्धिनः । पञ्चालाः केकया मत्स्याः सृञ्जयाश्चोद्यतायुधाः ॥ ११ ॥ तब पुत्रोंकी प्राणरक्षा चाहनेवाले पाण्डवोंने तुरंत आकर उन कौरव महारथियोंको रोका। पाण्डवोंके साथ पांचाल, केकय, मत्स्य और सृंजयदेशीय योद्धा भी अस्त्र-शस्त्र लिये उपस्थित थे ॥ ११ ॥
तद् युद्धमभवद् घोरं सुममहल्लोमहर्षणम् । त्वदीयैः पाण्डुपुत्राणां देवानासिव दानवैः ॥ १२ ॥ राजन्! फिर तो दानवोंके साथ देवताओंकी भाँति आपके सैनिकोंके साथ पाण्डवोंका अत्यन्त भयंकर युद्ध छिड़ गया, जो रोंगटे खड़े कर देनेवाला था ॥ १२ ॥
एवं युयुधिरे वीराः संरब्धाः कुरुपाण्डवाः । परस्परमुदीक्षन्तः परस्परकृतागसः ॥ १३ ॥ इस प्रकार एक-दूसरेके अपराध करनेवाले कौरव-पाण्डववीर परस्पर क्रोधपूर्ण दृष्टिसे देखते हुए युद्ध करने लगे ॥ १३ ॥
तेषां ददृशिरे कोपाद् वपूंष्यमिततेजसाम् । युयुत्सूनामिवाकाशे पतत्त्रिवरभोगिनाम् ॥ १४ ॥ क्रोधवश युद्ध करते हुए उन अमित तेजस्वी राजाओंके शरीर आकाशमें युद्धकी इच्छासे एकत्र हुए पक्षिराज गरुड़ तथा नागोंके समान दिखायी देते थे ॥ १४ ॥