भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1543

पक्षी और गाय आदि पशु भी चीत्कार करने लगे। उत्तम व्रतका पालन करनेवाले शुद्धचित्त साधु पुरुष भी अत्यन्त अशान्त हो उठे ॥ २२ ॥
भ्रान्तसर्वमहाभूतमावर्तितदिवाकरम् ।
त्रैलोक्यमभिसंतप्तं ज्वराविष्टमिवाभवत् ॥ २३ ॥
सम्पूर्ण महाभूत मानो चक्कर काट रहे थे। सूर्य भी घूमता-सा प्रतीत होता था। तीनों लोकोंके प्राणी ज्वरग्रस्तके समान संतप्त हो उठे थे ॥ २३ ॥