भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1581

उनका जो शिव शरीर है, वह तेजोमय और परम कान्तिमान् है। वह देवताओंके उपयोगमें आता है तथा मनुष्यलोकमें उनका प्रकाशमान घोर शरीर 'अग्नि' कहलाता है॥ १४२॥

ब्रह्मचर्यं चरत्येष शिवा यास्य तनुस्तया।
यास्य घोरतरा मूर्तिः सर्वानत्ति तयेश्वरः॥ १४३॥
उनकी जो शिव मूर्ति है, वह जगत्की रक्षाके लिये ब्रह्मचर्यका पालन करती है और उनकी जो घोरतर मूर्ति है, उसके द्वारा भगवान् शंकर सम्पूर्ण जगत्का संहार करते हैं॥ १४३॥

यन्निर्दहति यत् तीक्ष्णो यदुग्रो यत् प्रतापवान्।
मांसशोणितमज्जादो यत् ततो रुद्र उच्यते॥ १४४॥
ये प्रतापी देवता प्रलयकालमें अत्यन्त तीक्ष्ण एवं उग्र रूप धारण करके सबको दग्ध कर डालते हैं और प्राणियोंके रक्त, मांस एवं मज्जाको भी भक्षण करते हैं; अतः रौद्रभावके कारण 'रुद्र' कहलाते हैं॥ १४४॥

एष देवो महादेवो योऽसौ पार्थ तवाग्रतः।
संग्रामे शात्रवान् निघ्नंस्त्वया दृष्टः पिनाकधृक्॥ १४५॥
अर्जुन! संग्रामभूमिमें जो तुम्हारे आगे शत्रुओंका संहार करते हुए दिखायी दिये हैं, वे ये ही पिनाकधारी भगवान् महादेव हैं॥ १४५॥

सिन्धुराजवधार्थाय प्रतिज्ञाते त्वयानघ।
कृष्णेन दर्शितः स्वप्ने यस्तु शैलेन्द्रमूर्धनि॥ १४६॥
एष वै भगवान् देवः संग्रामे याति तेऽग्रतः।
येन दत्तानि तेऽस्त्राणि यैस्त्वया दानवा हताः॥ १४७॥
निष्पाप अर्जुन! जब तुमने सिंधुराजके वधकी प्रतिज्ञा की थी, उस समय स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णने तुम्हें गिरिराजके शिखरपर जिनका दर्शन कराया था, ये वे ही भगवान् शंकर संग्राममें तुम्हारे आगे-आगे चल रहे हैं। उन्होंने ही तुम्हें वे दिव्यास्त्र प्रदान किये थे, जिनके द्वारा तुमने दानवोंका संहार किया है॥ १४६-१४७॥

धन्यं यशस्यमायुष्यं पुण्यं वेदैश्च सम्मितम्।
देवदेवस्य ते पार्थ व्याख्यातं शतरुद्रियम्॥ १४८॥
पार्थ! यह देवाधिदेव भगवान् शिवके 'शतरुद्रिय' स्तोत्रकी व्याख्या की गयी है। यह स्तोत्र वेदोंके समान परम पवित्र तथा धन, यश और आयुकी वृद्धि करनेवाला है॥ १४८॥

सर्वार्थसाधनं पुण्यं सर्वकिल्बिषनाशनम्।
सर्वपापप्रशमनं सर्वदुःखभयापहम्॥ १४९॥
इसके पाठसे सम्पूर्ण मनोरथोंकी सिद्धि होती है। यह पवित्र स्तोत्र सम्पूर्ण किल्बिषोंका नाशक, सब पापोंका निवारक तथा सब प्रकारके दुःख और भयको दूर करनेवाला