महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1935, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंविशालायतताम्राक्षैः पूर्णचन्द्रनिभाननैः ।
एषा भूः कीर्यते राज्ञां शिरोभिरपलायिनाम् ॥ ६२ ॥
‘युद्ध छोड़कर पीछे न हटनेवाले राजाओंके मस्तकोंसे रणभूमि पटती जा रही है। वे मस्तक पूर्ण चन्द्रमाके समान मनोहर मुख और लाल-लाल विशाल नेत्रोंसे सुशोभित हैं।। ६२ ।।
एते सुपरिघाकाराः पुण्यगन्धानुलेपनाः ।
उद्यतायुधशौण्डानां पात्यन्ते सायुधा भुजाः ॥ ६३ ॥
‘अस्त्र उठाये हुए युद्ध-कुशल वीरोंकी ये परिघ-जैसी मोटी और पवित्र सुगन्धयुक्त चन्दनसे चर्चित भुजाएँ आयुधोंसहित काटकर गिरायी जाने लगी हैं ।। ६३ ।।
निरस्तनेत्रजिह्वान्त्रा वाजिनः सह सादिभिः ।
पतिताः पात्यमानाश्च क्षितौ क्षीणाश्च शेरते ॥ ६४ ॥
‘जिनके नेत्र, जीभ और आँतें बाहर निकल आयी हैं, वे गिरे और गिराये जाते हुए घुड़सवारोंसहित घोड़े क्षत-विक्षत होकर पृथ्वीपर सो रहे हैं ।। ६४ ।।
एते पर्वतशृङ्गाणां तुल्यरूपा हता द्विपाः ।
संछिन्नभिन्नाः पार्थेन प्रपतन्त्यद्रयो यथा ॥ ६५ ॥
‘ये पर्वतशिखरोंके समान विशालकाय हाथी अर्जुनके द्वारा मारे जाकर छिन्न-भिन्न हो पर्वतोंके समान धराशायी हो रहे हैं ।। ६५ ।।
गन्धर्वनगराकारा रथा हतनरेश्वराः ।
विमानानीव पुण्यानि स्वर्गिणां निपतन्त्यमी ॥ ६६ ॥
‘जिनके नरेश मारे गये हैं, वे गन्धर्वनगरके समान विशाल रथ स्वर्गवासियोंके पुण्यमय विमानोंके समान नीचे गिर रहे हैं ।। ६६ ।।
व्याकुलीकृतमत्यर्थं पश्य सैन्यं किरीटिना ।
नानामृगसहस्राणां यूथं केसरिणा यथा ॥ ६७ ॥
‘देखो, किरीटधारी अर्जुनने कौरव-सेनाको उसी प्रकार अत्यन्त व्याकुल कर दिया है, जैसे सिंह नाना जातिके सहस्रों मृगोंको भयभीत कर देता है ।। ६७ ।।
घ्नन्त्येते पार्थिवान् वीराः पाण्डवाः समभिद्रुताः ।
नागाश्वरथपत्त्योघांस्तावकान् समभिघ्नतः ॥ ६८ ॥
‘तुम्हारे सैनिकोंके आक्रमण करनेपर ये वीर पाण्डवयोद्धा अपने ऊपर प्रहार करनेवाले राजाओं तथा हाथी, घोड़े, रथ और पैदलसमूहोंको मार रहे हैं ।। ६८ ।।
एष सूर्य इवाम्भोदैश्छन्नः पार्थो न दृश्यते ।
ध्वजाग्रं दृश्यते त्वस्य ज्याशब्दश्चापि श्रूयते ॥ ६९ ॥
‘जैसे सूर्य बादलोंसे ढक जाते हैं, उसी प्रकार आड़में पड़ जानेके कारण ये अर्जुन नहीं दिखायी देते हैं; परंतु इनके ध्वजका अग्रभाग दीख रहा है और प्रत्यंचाकी टंकार भी सुनायी