महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2044, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंजातरूपमयीऋष्टीः पट्टिशान् हेमभूषणान् । दण्डैः कनकचित्रैश्च विप्रविद्धान् परश्वधान् ॥ १५ ॥ 'स्वर्णमयी ऋष्टि, हेमभूषित पट्टिश तथा सुवर्णजटित दण्डोंसे युक्त फरसे फेंके हुए हैं ॥ १५ ॥
अयःकुन्तांश्च पतितान् मुसलानि गुरूणि च । शतघ्नीः पश्य चित्रांश्च विपुलान् परिघांस्तथा ॥ १६ ॥ 'लोहेके कुन्त (भाले), भारी मूसल, विचित्र शतघ्नियां और विशाल परिघ इधर-उधर पड़े हैं ॥ १६ ॥
चक्राणि चापविद्धानि तोमरांश्च महारणे । नानाविधानि शस्त्राणि प्रगृह्य जयगृद्धिनः ॥ १७ ॥ जीवन्त इव दृश्यन्ते गतसत्त्वास्तरस्विनः । 'इस महासमरमें फेंके गये इन चक्रों और तोमरोंको भी देखो। विजयकी अभिलाषा रखनेवाले वेगशाली योद्धा नाना प्रकारके शस्त्रोंको हाथमें लिये हुए ही अपने प्राण खो बैठे हैं; तथापि जीवित-से दिखायी देते हैं ॥ १७ १/२ ॥
गदाविमथितैर्गात्रैर्मुसलैर्भिन्नमस्तकान् ॥ १८ ॥ गजवाजिरथक्षुण्णान् पश्य योधान् सहस्रशः । 'देखो, सहस्रों योद्धाओंके शरीर गदाओंके आघातसे चूर-चूर हो रहे हैं। मूसलोंकी मारसे उनके मस्तक फट गये हैं, तथा हाथी, घोड़े एवं रथोंसे वे कुचल दिये गये हैं ॥ १८ १/२ ॥
मनुष्यहयनागानां शरशक्त्यृष्टिपट्टिशैः ॥ १९ ॥ परिघैरायसैर्घोरैरयःकुन्तैः परश्वधैः । शरीरैर्बहुभिश्छिन्नैः शोणितौघपरिप्लुतैः ॥ २० ॥ गतासुभिरमित्रघ्न संवृता रणभूमयः । 'शत्रुसूदन! बाण, शक्ति, ऋष्टि, पट्टिश, लोहमय परिघ, भयंकर लोहनिर्मित कुन्त और फरसोंसे मनुष्यों, घोड़ों और हाथियोंके बहुसंख्यक शरीर छिन्न-भिन्न होकर खूनसे लथपथ और प्राणशून्य हो गये हैं और उनके द्वारा रणभूमि आच्छादित दिखायी देती है ॥ १९-२० १/२ ॥
बाहुभिश्चन्दनादिग्धैः साङ्गदैर्हेमभूषितैः ॥ २१ ॥ सतलत्रैः सकेयूरैर्भाति भारत मेदिनी । 'भारत! चन्दनचर्चित, अंगदों और केयूरोंसे अलंकृत, सोनेके अन्य आभूषणोंसे विभूषित तथा दस्तानोंसे युक्त वीरोंकी कटी हुई भुजाओंसे युद्धभूमिकी अद्भुत शोभा हो रही है ॥ २१ १/२ ॥
साङ्गुलित्रैर्भुजाग्रैश्च विप्रविद्धैरलंकृतैः ॥ २२ ॥