महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2406, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंनरेन्द्र! अर्जुन और कर्णके बाणोंद्वारा मारे गये हाथी, घोड़े एवं मनुष्योंसे तथा बाणोंसे नष्ट-भ्रष्ट होकर गिरे पड़े रथोंसे इस पृथ्वीपर चलना-फिरना असम्भव हो गया है ।। १३ ।। रथैर्वरिष्ठून्मथितैः सुकल्पैः सयोधशस्त्रैश्च वरायुधैर्ध्वजैः । विशीर्णयोक्त्रैर्विनिकृत्तबन्धनै- र्निकृत्तचक्राक्षयुगत्रिवेणुभिः ॥ १४ ॥ सजे-सजाये रथ बाणोंके आघातसे मथ डाले गये हैं। उनके साथ जो योद्धा, शस्त्र, श्रेष्ठ आयुध और ध्वज आदि थे, उनकी भी यही दशा हुई है। उनके पहिये, बन्धनरज्जु, धुरे, जूए और त्रिवेणु काष्ठके भी टुकड़े-टुकड़े हो गये हैं ॥ १४ ॥ विमुक्तशस्त्रैश्च तथा व्युपस्करै- र्हतानुकर्षैर्विनिषङ्गबन्धनैः । प्रभग्ननीडैर्मणिहेमभूषितैः स्तृता मही द्यौरिव शारदैर्घनैः ॥ १५ ॥ उनपर जो अस्त्र-शस्त्र रखे गये थे, वे सब दूर जा पड़े हैं। सारी सामग्री नष्ट हो गयी है। अनुकर्ष, तूणीर और बन्धनरज्जु—ये सब-के-सब नष्ट-भ्रष्ट हो गये हैं। उन रथोंकी बैठकें टूट-फूट गयी हैं। सुवर्ण और मणियोंसे विभूषित उन रथोंद्वारा आच्छादित हुई पृथ्वी शरद्-ऋतुके बादलोंसे ढके हुए आकाशके समान जान पड़ती है ॥ १५ ॥ विकृष्यमाणैर्जवनैस्तुरङ्गमै- र्हतेश्वरै राजरथैः सुकल्पितैः । मनुष्यमातङ्गरथाश्वराशिभि- र्द्रुतं व्रजन्तो बहुधा विचूर्णिताः ॥ १६ ॥ जिनके स्वामी (रथी) मारे गये हैं, राजाओंके उन सुसज्जित रथोंको, जब वेगशाली घोड़े खींचे लिये जाते थे और झुंड-के-झुंड मनुष्य, हाथी, साधारण रथ और अश्व भी भागे जा रहे थे, उस समय उनके द्वारा शीघ्रतापूर्वक भागनेवाले बहुत-से मनुष्य कुचलकर चूर-चूर हो गये हैं ॥ १६ ॥ सहेमपट्टाः परिघाः परश्वधाः शिताश्च शूला मुसलानि मुद्गराः । पेतुश्च खड्गा विमला विकोशा गदाश्च जाम्बूनदपट्टनद्धाः ॥ १७ ॥ सुवर्ण-पत्रसे जड़े गये परिघ, फरसे, तीखे शूल, मूसल, मुद्गर, म्यानसे बाहर निकाली हुई चमचमाती तलवारें और स्वर्णजटित गदाएँ जहाँ-तहाँ बिखरी पड़ी हैं ॥ १७ ॥ चापानि रुक्माङ्गदभूषणानि शराश्च कार्तस्वरचित्रपुङ्खाः ।