महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2576, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंतदनन्तर अर्जुन, भीमसेन, माद्रीपुत्र पाण्डुकुमार नकुल, सहदेव, पुरुषसिंह सात्यकि, द्रौपदीके पाँचों पुत्र, धृष्टद्युम्न, शिखण्डी, पांचाल और सोमक वीर—इन सबने युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये उन्हें चारों ओरसे घेर लिया॥ ७-८ १/२ ॥ ते समन्तात् परिवृताः पाण्डवाः पुरुषर्षभाः ॥ ९ ॥ क्षोभयन्ति स्म तां सेनां मकराः सागरं यथा । युधिष्ठिरको सब ओरसे घेरकर खड़े हुए पुरुषप्रवर पाण्डव उस सेनाको उसी प्रकार क्षुब्ध करने लगे, जैसे मगर समुद्रको ॥ ९ १/२ ॥ वृक्षानिव महावाताः कम्पयन्ति स्म तावकान् ॥ १० ॥ पुरोवातेन गङ्गेव क्षोभ्यमाणा महानदी । अक्षोभ्यत तदा राजन् पाण्डूनां ध्वजिनी ततः ॥ ११ ॥ जैसे महावायु (आँधी) वृक्षोंको हिला देती है, उसी प्रकार पाण्डववीरोंने आपके सैनिकोंको कम्पित कर दिया। राजन्! जैसे पूर्वी हवा महानदी गंगाको क्षुब्ध कर देती है, उसी प्रकार उन सैनिकोंने पाण्डवोंकी सेनामें भी हलचल मचा दी ॥ १०-११ ॥ प्रस्कन्द्य सेनां महतीं महात्मानो महारथाः । बहवश्चुक्रुशुस्तत्र क्व स राजा युधिष्ठिरः ॥ १२ ॥ भ्रातरो वास्य ते शूरा दृश्यन्ते नेह केन च । वे बहुसंख्यक महामनस्वी मद्रमहारथी विशाल पाण्डव-सेनाको मथकर जोर-जोरसे पुकार-पुकारकर कहने लगे—‘कहाँ है वह राजा युधिष्ठिर? अथवा उसके वे शूरवीर भाई? वे सब यहाँ दिखायी क्यों नहीं देते? ॥ १२ १/२ ॥ धृष्टद्युम्नोऽथ शैनेयो द्रौपदेयाश्च सर्वशः ॥ १३ ॥ पञ्चालाश्च महावीर्याः शिखण्डी च महारथः । ‘धृष्टद्युम्न, सात्यकि, द्रौपदीके सभी पुत्र, महापराक्रमी पांचाल और महारथी शिखण्डी—ये सब कहाँ हैं?’ ॥ एवं तान् वादिनः शूरान् द्रौपदेया महारथाः ॥ १४ ॥ अभ्यघ्नन् युयुधानश्च मद्रराजपदानुगान् । ऐसी बातें कहते हुए उन मद्रराजके अनुगामी वीर योद्धाओंको द्रौपदीके महारथी पुत्रों और सात्यकिने मारना आरम्भ किया ॥ १४ १/२ ॥ चक्रैर्विमथितैः केचित् केचिच्छिन्नैर्महाध्वजैः ॥ १५ ॥ ते दृश्यन्तेऽपि समरे तावका निहताः परैः । समरांगणमें आपके वे सैनिक शत्रुओंद्वारा मारे जाने लगे। कुछ योद्धा छिन्न-भिन्न हुए रथके पहियों और कुछ कटे हुए विशाल ध्वजोंके साथ ही धराशायी होते दिखायी देने लगे ॥ १५ १/२ ॥