भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 2650

‘वृष्णिनन्दन श्रीकृष्ण! यदि वह मेरे भयसे युद्धसे भाग न जाय, तो मेरे द्वारा उस मूढ़ दुर्योधनको आप मारा गया ही समझें।। २५ १/२ ।। मम ह्येतदशक्तं वै वाजिवृन्दमरिंदम ।। २६ ।। सोढुं ज्यातलनिर्घोषं याहि यावन्निहन्म्यहम् । ‘शत्रुदमन! यह घुड़सवारोंकी सेना मेरे गाण्डीव धनुषकी टंकारको नहीं सह सकेगी। आप घोड़े बढ़ाइये, मैं अभी इन सबको मारे डालता हूँ’ ।। २६ १/२ ।। एवमुक्तस्तु दाशार्हः पाण्डवेन यशस्विना ।। २७ ।। अचोदयद्धयान् राजन् दुर्योधनबलं प्रति । राजन्! यशस्वी पाण्डुपुत्र अर्जुनके ऐसा कहनेपर दशार्हकुलनन्दन श्रीकृष्णने दुर्योधनकी सेनाकी ओर घोड़े बढ़ा दिये ।। २७ १/२ ।। तदनीकमभिप्रेक्ष्य त्रयः सज्जा महारथाः ।। २८ ।। भीमसेनोऽर्जुनश्चैव सहदेवश्च मारिष । प्रययुः सिंहनादेन दुर्योधनजिघांसया ।। २९ ।। मान्यवर! उस सेनाको देखकर तीन महारथी भीमसेन, अर्जुन और सहदेव युद्ध-सामग्रीसे सुसज्जित हो दुर्योधनके वधकी इच्छासे सिंहनाद करते हुए आगे बढ़े ।। २८-२९ ।। तान् प्रेक्ष्य सहितान् सर्वान् जवेनोद्यतकार्मुकान् । सौबलोऽभ्यद्रवद् युद्धे पाण्डवानातातयिनः ।। ३० ।। उन सबको बड़े वेगसे धनुष उठाये एक साथ आक्रमण करते देख सुबलपुत्र शकुनि रणभूमिमें आततायी पाण्डवोंकी ओर दौड़ा ।। ३० ।। सुदर्शनस्तव सुतो भीमसेनं समभ्ययात् । सुशर्मा शकुनिश्चैव युयुधाते किरीटिना ।। ३१ ।। आपका पुत्र सुदर्शन भीमका सामना करने लगा। सुशर्मा और शकुनिने किरीटधारी अर्जुनके साथ युद्ध छेड़ दिया ।। सहदेवं तव सुतो हयपृष्ठगतोऽभ्ययात् । ततो हि यत्नतः क्षिप्रं तव पुत्रो जनाधिप ।। ३२ ।। प्रासेन सहदेवस्य शिरसि प्राहरद् भृशम् । नरेश्वर! घोड़ेकी पीठपर बैठा हुआ आपका पुत्र दुर्योधन सहदेवके सामने आया। उसने बड़े यत्नसे सहदेवके मस्तकपर शीघ्रतापूर्वक प्रासका प्रहार किया ।। सोपाविशद् रथोपस्थे तव पुत्रेण ताडितः ।। ३३ ।। रुधिराप्लुतसर्वाङ्ग आशीविष इव श्वसन् । आपके पुत्रद्वारा ताड़ित होकर सहदेव फुफकारते हुए विषधर सर्पके समान लंबी साँस खींचते हुए रथके पिछले भागमें बैठ गये। उनका सारा शरीर लहूलुहान हो गया ।। ३३ १/२ ।।