भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 273

दीप्यमाना महाशक्त्यो जग्मुराधिरथिं प्रति । उनके हाथोंसे छूटी हुई वे अत्यन्त वेगशालिनी सर्पाकार महाशक्तियाँ अपनी प्रभासे प्रकाशित होती हुई कर्णकी ओर चलीं ॥ ५८ १/२ ॥ ता निकृत्य शरव्रातैस्त्रिभिस्त्रिभिरजिह्मगैः ॥ ५९ ॥ ननाद बलवान् कर्णः पार्थाय विसृजञ्छरान् । परंतु बलवान् कर्णने सीधे जानेवाले तीन-तीन बाणसमूहोंद्वारा उन शक्तियोंके टुकड़े-टुकड़े करके अर्जुनपर बाणोंकी वर्षा करते हुए सिंहनाद किया ॥ ५९ १/२ ॥ अर्जुनश्चापि राधेयं विद्ध्वा सप्तभिराशुगैः ॥ ६० ॥ कर्णादवरजं बाणैर्जघान निशितैः शरैः । अर्जुनने भी राधानन्दन कर्णको सात शीघ्रगामी बाणोंद्वारा बींधकर अपने पैने बाणोंसे उसके छोटे भाईको मार डाला ॥ ६० १/२ ॥ ततः शत्रुंजयं हत्वा पार्थः षड्भिरजिह्मगैः ॥ ६१ ॥ जहार सद्यो भल्लेन विपाटस्य शिरो रथात् । तत्पश्चात् सीधे जानेवाले छः सायकोंद्वारा शत्रुंजयका संहार करके एक भल्लद्वारा रथपर बैठे हुए विपाटका मस्तक तत्काल काट गिराया ॥ ६१ १/२ ॥ पश्यतां धार्तराष्ट्राणामेकेनैव किरीटिना ॥ ६२ ॥ प्रमुखे सूतपुत्रस्य सोदर्या निहतास्त्रयः । इस प्रकार धृतराष्ट्रपुत्रोंके देखते-देखते एकमात्र अर्जुनने युद्धके मुहानेपर सूतपुत्र कर्णके तीन भाइयोंका वध कर डाला ॥ ६२ १/२ ॥ ततो भीमः समुत्पत्य स्वरथाद् वैनतेयवत् ॥ ६३ ॥ वरासिना कर्णपक्षान् जघान दश पञ्च च । तदनन्तर भीमसेनने गरुड़की भाँति अपने रथसे उछलकर उत्तम खड्गद्वारा कर्णपक्षके पंद्रह योद्धाओंको मार डाला ॥ ६३ १/२ ॥ पुनस्तु रथमास्थाय धनुरदाय चापरम् ॥ ६४ ॥ विव्याध दशभिः कर्णं सूतमश्वांश्च पञ्चभिः । फिर भी उन्होंने अपने रथपर बैठकर दूसरा धनुष हाथमें ले लिया और दस बाणोंद्वारा कर्णको तथा पाँच बाणोंसे उसके सारथि और घोड़ोंको भी घायल कर दिया ॥ ६४ १/२ ॥ धृष्टद्युम्नोऽप्यसिवरं चर्म चादाय भास्वरम् ॥ ६५ ॥ जघान चन्द्रवर्माणं बृहत्क्षत्रं च नैषधम् । धृष्टद्युम्नने भी श्रेष्ठ खड्ग और चमकीली ढाल लेकर चन्द्रवर्मा तथा निषधराज बृहत्क्षत्रका काम तमाम कर दिया ॥ ६५ १/२ ॥ ततः स्वरथमास्थाय पाञ्चाल्योऽन्यच्च कार्मुकम् ॥ ६६ ॥