भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 2746, कुल 3237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2746

पुण्यैः पुष्पैः सदा दिव्यैः कीर्यमाणाः पुनः पुनः । वहाँ देवता और पितर लता-वेलोंके साथ आमोदित होते हैं, उनके ऊपर सदा पवित्र एवं दिव्य पुष्पोंकी वर्षा बारंबार होती रहती है ॥ ६ १/२ ॥ आक्रीडभूमिः सा राजंस्तासामप्सरसां शुभा ॥ ७ ॥ सुभूमिकेति विख्याता सरस्वत्यास्तटे वरे । राजन्! सरस्वतीके सुन्दर तटपर वह उन अप्सराओंकी मंगलमयी क्रीडाभूमि है, इसलिये वह स्थान सुभूमिक नामसे विख्यात है ॥ ७ १/२ ॥ तत्र स्नात्वा च दत्त्वा च वसु विप्राय माधवः ॥ ८ ॥ श्रुत्वा गीतं च तद् दिव्यं वादित्राणां च निःस्वनम् । छायाश्च विपुला दृष्ट्वा देवगन्धर्वरक्षसाम् ॥ ९ ॥ गन्धर्वाणां ततस्तीर्थमागच्छद् रोहिणीसुतः । बलरामजीने वहाँ स्नान करके ब्राह्मणोंको धन दान किया और दिव्य गीत एवं दिव्य वाद्योंकी ध्वनि सुनकर देवताओं, गन्धर्वों तथा राक्षसोंकी बहुत-सी मूर्तियोंका दर्शन किया। तत्पश्चात् रोहिणीनन्दन बलराम गन्धर्वतीर्थमें गये ॥ ८-९ १/२ ॥ विश्वावसुमुखास्तत्र गन्धर्वास्तपसान्विताः ॥ १० ॥ नृत्यवादित्रगीतं च कुर्वन्ति सुमनोरमम् । वहाँ तपस्यामें लगे हुए विश्वावसु आदि गन्धर्व अत्यन्त मनोरम नृत्य, वाद्य और गीतका आयोजन करते रहते हैं ॥ १० १/२ ॥ तत्र दत्त्वा हलधरो विप्रेभ्यो विविधं वसु ॥ ११ ॥ अजाविकं गोखरोष्ट्रं सुवर्णं रजतं तथा । भोजयित्वा द्विजान् कामैः संतर्प्य च महाधनैः ॥ १२ ॥ प्रययौ सहितो विप्रैः स्तूयमानश्च माधवः । हलधरने वहाँ भी ब्राह्मणोंको भेड़, बकरी, गाय, गदहा, ऊँट और सोना-चाँदी आदि नाना प्रकारके धन देकर उन्हें इच्छानुसार भोजन कराया तथा प्रचुर धनसे संतुष्ट करके ब्राह्मणोंके साथ ही वहाँसे प्रस्थान किया। उस समय ब्राह्मण लोग बलरामजीकी बड़ी स्तुति करते थे ॥ ११-१२ १/२ ॥ तस्माद् गन्धर्वतीर्थाच्च महाबाहुररिंदमः ॥ १३ ॥ गर्गस्रोतो महातीर्थमाजगामैककुण्डली । उस गन्धर्वतीर्थसे चलकर एक कानमें कुण्डल धारण करनेवाले शत्रुदमन महाबाहु बलराम गर्गस्रोत नामक महातीर्थमें आये ॥ १३ १/२ ॥ तत्र गर्गेण वृद्धेन तपसा भावितात्मना ॥ १४ ॥ कालज्ञानगतिश्चैव ज्योतिषां च व्यतिक्रमः ।